खौफजदा इलाका…बसना तो दूर, गुजरने से भी डरते थे लोग

  दक्षिण भारत के कुख्यात चंदन तस्कर वीरप्पन का नाम तो आप ने सुना ही होगा…चंदन की तस्करी के अलावा वह हाथीदांत की तस्करी, हाथियो का अवैध शिकार, पुलिस व वन्य अधिकारियों की हत्या व अपहरण के कई मामलों में अभियुक्त था…इसलिए सरकार ने उसे पकडऩे के लिए करीब 20 करोड़ रूपये खर्च किए थे…ऐसे ही डाकू यहां भी रहे हैं…यहां मतलब, कौन सा इलाका…न फाजिल्का नाम था और न ही बंगला…हां, सतलुज दरिया था…उसके आसपास घने जंगल थे…जंगलों में अन्य डाकूओं के साथ साथ हस्स हस्स के पौधों के तस्कर भी थे…हस्स हस्स के पौधे से सैंट बनाया जाता है और तस्कर यहां से इस पौधे की तस्करी करते थे…(बंगला बनने के बाद जब ऑलिवर गार्डन बना तो उसमें भी हस्स हस्स का पौधा था), इसलिए डाकू व तस्कर यहां से गुजरने वालों पर हमला करते थे… तभी तो यहां से लोग टोलियां बनाकर गुजरते थे…इलाके में जंगल था, हर व्यक्ति यहां आने से डरता था…तेजधार हथियारों के साथ लंबे काफिले संग चलते यहां से गुजरते थे…दी पंजाब नॉर्थ-वैस्ट फ्रंटियर प्रीविंस एंड कश्मीर बुक अनुसार 1803 में यहां से दौलत राव सिंधीया भी काफिला लेकर गुजरे थे। इलाके में बहावलपुर के नवाब व ममदोट के नवाब ने कब्जा कर लिया…उन्होंने अपनी सरहदें निर्धारित की…यहां छोटे छोटे किले बनवाए…यहां महाराजा रणजीत सिंह के अंडर भी कुछ इलाका रहा है…

        नरेल से वाया हिसार, सिरसा, मलोट से होती हुई एक लंबी चौड़ी सडक़ फाजिल्का तक पहुंचती थी…जो गांव मौजम तक जाती थी…हजारों मील लंबी थी यह सडक़ …इसके बाद लोग दरिया पार करके दूसरी तरफ पहुंचते थे और वहां से यह सडक़ जिला औकाड़ा तक पहुंचती थी…यह इलाका दरिया किनारे था और रमणीक था…दूसरी बात दरिया के पार महाराजा रणजीत सिंह का इलाका था…तभी तो ब्रिटिश अधिकारियों ने इस इलाके में कब्जे की हिम्मत नहीं की…महाराजा रणजीत सिंह की मौत के बाद यहां ब्रिटिश अधिकारी पहुंचे…बाधा झील के किनारे बंगला बनवाया…जो निर्माणाधीन था और उसे देखने के लिए पहली बार उस बंगले में जिला सिरसा के कस्टम अधिकारी ऑलिवर आए थे…इसके बाद जब वह जिला भटियाणा (अब सिरसा) के सहायक अधिक्षक बने तो उन्हें मुलतान में तैनात किया गया…यह बात लेखक जुगल किशोर गुप्ता ने अपनी पुस्तक हिस्टरी ऑफ सिरसा टाऊन मे लिखी है …खैर, यह बात फिर लिखेंगे…मगर यह बताना जरूरी है कि इससे पहले यहां परगना बहक, वट्टू, चिश्ती का यहां आगमन हो चुका था…जिन्होंने इस इलाके को आबाद किया…(बाकी अगले ब्लॉग में)

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