
22 का 22 से गहरा रिश्ता है 22 …लाइन कुछ अटपटी से लगती है…मगर यह हकीकत है बाई…फाजिल्का का 22 से गहरा रिश्ता है…वैसे भी पजाब के कई इलाकों में भाई या दोस्त को बाई जी कहते हैं…जान पहचान न भी हो तो भी कई लोग दूसरों को बाई जी कहकर पुकारते हैं…फजिल्का में भी ऐसे ही बुलाकर एकदूसरे को अपनी मिठास भरी आवाज और प्यार का संदेश देना 22 का ही नाम है।
बात करते हैं 22 पर…बंगले को आप सब जानते हैं…बंगले के निर्माणकर्ता यानि जिसने बंगले का निर्माण करवाया था … पैट्रिक एलैगजैंडर वंस एगन्यू शॉटकट में वंस एगन्यू बोलते थे … पैट्रिक एलैगजैंडर तो उसका सर नेम था…उसका जन्म 1822 का था …फाजिल्का में वह 1844 में आया, यानि उस समय उसकी आयु 22 साल की थी…यहां से उसका तबादला फिरोजपुर हो गया और वहां से कई शहरों से होते हुए दूसरे सिख एगलो युद्ध (मुलतान) में उसकी मौत हो गई। समझ गए न, शुरूआत 22 से हुई थी।

फाजिल्का शहर के बीचो–बीच है क्लॉक टावर…जिसकी तस्वीर पंजाब विधान सभा की आर्ट गैलरी में लगाई गई है और इसका नाम देश विदेश में प्रसिद्ध है…फाजिल्का में कोई आए और क्लॉक टावर को देखे बिना नहीं रहता…खासियत यह भी है कि आप क्लॉक टावर पर चले जाओ…वहां खड़े होकर देखो, आपने किस शहर जाना है…आपको वहां से सडक़ मिल ही जाएगी। जब यह खासियत हैं तो खासियत यह भी हैं कि जिस क्लॉक टावर की हम बात कर रहे हैं, उस क्लॉक टावर के निर्माण पर 2200 रूपये खर्च आया था।
फाजिल्का जिले का नोटीफिकेट 26 जुलाई 2011 को हुआ था…वो जिला जिसे जिले का दर्जा दिलाने के लिए बरसों लगे…कई बार आंदोलन हुए…मगर जो आंदोलन 2010-11 में हुआ, वो तो ऐतिहासिक था…धरना, प्रदर्शन, रैली और बंद के बाद मरणव्रत तक रखा गया…आखिरकार फाजिल्का को मिला जिले का दर्जा…पंजाब में फाजिल्का को 22वां जिला घोषित किया गया था बाई जी।
जिले का दर्जा मिलने के बाद फाजिल्का से जिसने वाहन खरीदकर उसका नंबर लगवाया और उसे जो नंबर मिला वो पी.बी. 22 मिला है…तभी तो कहते हैं कि फाजिल्का का 22 से गहरा रिश्ता रहा है।
