खतरनाक बीमारी से सैंकड़ों लोगों की मौत !!!

पंजाब में 40 साल तक शासन करने वाले महाराजा रणजीत सिंह की बचपन में चेचक की बीमारी के कारण एक आंख की रोशनी चली गई थी…19वीं सदी में इस बीमारी का काफी प्रकोप रहा है…क्योंकि यह रोग अत्यंत संक्रामक है…जब तब रोग की महामारी फैला करती थी…कोई भी जाति और आयु इससे नहीं बची थी…टीके के आविष्कार से पूर्व इस रोग से बहुत अधिक मृत्यु होती रही है…फाजिल्का क्षेत्र भी इससे अछूता नहीं रहा…गांवों में इस बीमारी का काफ ी प्रकोप रहा है…गांव कबूल शाह हिठाड़, आसफवाला, चूहड़ी वाला, खानपुर, जोडक़ी, चिमने वाला आदि गांव इससे प्रभावित थे…सैंकड़ों लोगों की मौत हो गई…तब भटियाणा (Sirsa) के D.C. थे J.H. Oliver…उन्होंने इस बीमारी पर काबू पाने के लिए दस रूपये सैलरी के हिसाब से व्यक्ति तैनात किए थे…जो इलाज करते थे…गांव में आलिवर की देखरेख में कैंप लगाए गए…पीडि़तों को टीके लगाए गए…उस समय कैंपों में फाजिल्का के लोगों ने काफी सहयोग दिया था…

         बात हो रही है ब्रिटिश अधिकारी जे.एच.ओलिवर के बारे में …जिन द्वारा फाजिल्का के विकास में योगदान को भुलाया नहीं जा सकता…उन्होंने फाजिल्का के बीचोबीच ओलिवर गंज मार्केट (मेहरीयां बाजार) का निर्माण करवाया था…जब वह जिला सिरसा में कस्टम विभाग के अधिकारी थे तो उस समय वह पहली बार फाजिल्का आए थे…1844 में …जब बंगले का निर्माण हो रहा था…हिस्टरी ऑफ सिरसा टाऊन में लेखक जुगल किशोर गुप्ता ने ओलिवर के अनुसार लिखा है कि उस वक्त फाजिल्का इलाका सुरक्षित नहीं था…यहां से गुजरना खतरे से खाली नहीं था…चोर, डाकू, शेर, सांप जैसे जंगली जानवरों का खौफ था…मलोट रोड और फिरोजपुर रोड पर लोग टोलियां बनाकर गुजरते थे…फिर वह जिला भटियाणा (अब सिरसा) के सहायक अधिक्षक बने तो उन्हें मुलतान में तैनात किया गया। इसके बाद उन्हें 1846 में फाजिल्का में तैनात कर दिया गया…तब Fazilka, Arniwala, Abohar में पुलिस पोस्ट खाली थी…अरनीवाला-जोधका में ही एक कस्टम पोस्ट थी।

Mr. Basant Garg

           इलाके में ओलिवर एक प्रभावशाली अधिकारी के नाम से प्रसिद्ध हो चुके थे…उन्होंने इस शहर को बुलंदियों तक पहुंचाया और लोग उन्हें इलाके का शेर के नाम से पुकारने लगे(ब्योरा आगे लिखे जाने वाले ब्लॉगस में दिया जाएगा) …फाजिल्का तहसील का पहली बार स्थायी बंदोबस्त करने का श्रेय भी ओलिवर को जाता है…उन्होंने सिरसा जिला के लिए फाजिल्का तहसील को चार परगनों में बांटा सेटलमेंट आफिसर ओलिवर की ओर से स्थायी बंदोबस्त 1857-63 में किया गया, जो 1883 तक चलता रहा। इस बीच ओलिवर डीसी बन गए और साथ ही उन्हें मैरिज रजिस्ट्रार का चार्ज भी दिया गया।…ओलिवर के पास जिले का चार्ज 1858-68 तक रहा। उन्हें 1500 रूपये प्रति माह वेतन दिया जाता था।

Mr. Manpreet Singh

          जब दोबारा जिलाबंदी हुई तो ओलिवर ने अपना पहला आदेश जारी किया कि 16 नवंबर 1859 से 30 जनवरी 1860 तक जिला भर में अपने हथियार जमा करवा दें, ताकि 1857(देश की आजादी की पहली लड़ाई)जैसे हालात पुन: उत्पन न हों…इसके बाद यहां कर्नल डायर की तैनाती की गई, जो 1870 तक रहे…जिससे ओलिवर काफी खफा थे और वह लंबी छुट्टी लेकर इंग्लेंड चले गए… हालांकि इस बीच मेलविल, कैप्टन एच. लारेन्स, टरॉफोर्ड, मेजर वुड भी रहे, लेकिन वह अपना नाम स्थापित करने में नाकाम रहे। अब फाजिल्का जिला बन चुका है और यहां डॉ. बसंत गर्ग को पहले डी.सी. तैनात होने का गर्व प्राप्त है…मौजूदा समय यहां मनप्रीत सिंह छत्तवाल डी.सी. हैं।

J.H. Oliver and Cdr. F. Hughes

टिप्पणी करे