
जिला फाजिल्का के शहर अबोहर में आभा नगरी है…काफी मशहूर है…वहां पांच पीरों की मजार है…जहां सावन की 15 तारीख (30 जुलाई) को मेला है…काफी मान्यता है…लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं…शीश निवाते हैं…मजार काफी प्राचीन है…जितनी प्राचीन है…उतनी ही दिलचस्प…बहुत दिलचस्प…

एक समय था…जब यहां बहुत बड़ा टीला हुआ करता था…आजकल थेह के नाम से पुकारते हैं…बताते हंै कि यहां राजा आबू चंदानी का महल था।(जिसके नाम पर आबू नगरी पुकारते हैं) सूर्यवंशी राजा आबा चंदनी के बाद राजा हरीचंद ने राजपाठ संभाला…राजा हरीचंद की एक ही बेटी ही थी…बताते हैं कि अंत समय में राजा को कुष्ठ रोग हो गया…शाही इलाज करवाया गया…मगर इलाज से कोई फर्क नहीं पड़ा।

उधर मुलतान (अब पाकिस्तान में) पांच पीरों दाता बख्श, शेख बाबा फरीद शकरगंज, बाहा उद्दीन जकारिया, लाल शहबाज कलंदर, सैय्यद जलालुद्दीन भूखड़ी की काफी मान्यता थी और उनके पास घोड़े थे…शहजादी को पता चला कि पीरों के घोड़ों के खून से राजा की बीमारी का इलाज हो सकता है…शहजादी सूरतगढ़ के ठाकुर की मदद से पांच पीरों के पास पहुंच गई…बात बताई…पीरों को घोड़े बहुत प्यारे थे…..तब उसने कोई छल किया और उनके घोड़े यहां ले आई…राजा की बीमारी ठीक हो गई…समय बीतता गया…राजा की मौत हो गई…ठाकुर शहजादी से विवाह करके आबू नगरी में रहने लगा।
पांच पीरों को घोड़ों से प्यार था और उन्होंने संदेश भिजवाया कि घोड़े लौटा दो…मगर शाहजादी व ठाकुर नहीं माने…तब पांच पीरों ने वहां से चलने की तैयारी कर ली…पांच पीरों ने अपनी पत्नियों को नसीहत दी कि वह उनके पीछे न आएं…पीर आबु नगरी पहुंच गए और टीले पर डेरा डाल लिया…समय बीतता गया…पीर वापिस मुलतान नहीं लौटे…तब उनकी पत्नियों को चिंता हुई…वह उन्हें ढूंढने के लिए निकल पड़ी…नसीहत को भूल गई…मुलतान से चलती हुई आबु नगरी पहुंच गई…पांच पीरों ने जब अपनी पत्नियों को देखा तो वह गुस्से में आ गए…उन्होंने श्राप दिया और उन्हें वहीं भस्म कर दिया।

वहीं शहजादी की जिद थी कि वह घोड़े नहीं लौटाएगी…पीरों को गुस्सा आ गया और उन्होंने आबू नगरी को नष्ट होने का श्राप दे दिया…मगर उस श्राप का कोई असर न हुआ…फिर पांच पीरों को अपनी दिव्य दृष्टि से पता चला कि उनका मामा अलीबख्श अपनी अदृश्य शक्ति से आबू नगरी को बचा रहा है…इस पर पीरों ने अपने मामा को धिक्कारा तो वह नगर छोडक़र चला गया…उसके जाते ही आबू नगरी राख हो गई…महल व घर खंडहर बन गए(ब्यौरा विभिन्न समाचार पत्रों व् अन्य स्थानों से लिया गया है )
