भूमि और भावनाओं के विभाजन में पिस गया Rangla Punjab

Indo pak partition-1

   सियासत और धर्म की कटरता से मिले इस दर्द से पहले सबके मन में था…आजादी के सुनहरे भविष्य का लालच …देश की जनता ने भारत विभाजन का जहरीला घूंट पी लिया…एक प्रश्न के नीचे दबा वो जहरीला घंूट…जिसका जवाब न तो आप के पास है और न ही मेरे पास…किसी को आज तक नहीं मिल पाया उसका जवाब…बटवारे से हरेक को ऐसा दर्द मिलेगा…यह तो कभी किसी ने सोचा भी नहीं था…हत्याएं…दुष्कर्म…दंगे…यह तो उन्होंने भी नहीं सोचा होगा…जिन्होंने Indo pak partition के बारे में सोचा था…सबका मत था कि धर्म ने नाम पर बटवारा होगया और आराम से हो जाएगा…पर हुआ नहीं…

     वो नेता…जिनका लोगों पर प्रभाव खत्म हो चुका था…युवा पीढ़ी…जिनके पास रोजगार नहीं था…वो भटक गए…समाचार और अफवाहों का दौर…जो बराबर चलता रहा…आग में घी का काम करता रहा…धर्म के नाम पर…लालच …हवस…डकैती का धंधा…इन सबके अलावा कई अन्य कारण भी थे…कारण जो भी हों…मगर जो हो गया…वो अब लौट कर नहीं आ सकता…युवा लड़कियां…जिन्होंने अपनी आबरू बचाने के लिए दरिया में छलांग लगा दी…कोई हैड से कूद गई…किसी ने खुद को खत्म कर लिया…काफिलों पर काफिले टूट पड़े…बच्चे, महिलाएं, युवा और बुजुर्ग…किस धर्म में लिखा है कि इन की बली ले लो…कौन चाहता था उजडऩा…मगर उजडऩा पड़ा…खासकर Punjab को बर्बाद होना पड़ा…

Indo Pak Border (Fazilka)

        पंजाब के टुकड़े हुए…सरहद के साथ लगते शहर … Fazilka…Ferozepur…Amritsar Or Gurdaspur…जहां की सरहद से लोग अधिक उधर से इधर और इधर से उधर गए…लाखों लोग…अगर पंजाब में सबसे ज्यादा त्रासदी की बात करें तो फाजिल्का ने सबसे अधिक दर्द झेला…1941 की जनगणना मुताबिक जिला फिरोजपुर में मुस्लमानों की संख्या 45.1, अमृतसर में 46.5 और गुरदासपुर में 50.2 प्रतिशत थी…मुस्लिम परिवार विभाजन की घोषणा होते ही भारतीय क्षेत्र छोडक़र पाकिस्तान की ओर चले गए थे, लेकिन पाकिस्तान से भारतीय पंजाब में आकर बसने वाले हिन्दु सिक्ख परिवार सितंबर के तीसरे सप्ताह आए थे…भारतीय क्षेत्र मेंं प्रवेश करने से पहले हजारों की टोलियों का कत्ल-ए-आम हुआ…उन दिनों इस ओर सतलुज दरिया में जलस्तर बढ़ा हूआ था…जिसके चलते लोगों को इस ओर पहुंचने में भारी दिक्कत हुई…लोगों ने बैलगाड़ी, बस या रेल के जरिए फाजिल्का बॉर्डर पार किया…जिनके पास कोई साधन नहीं थे…वे टोलियां बनाकर इस ओर पहुंचे…इन सबकी संख्या चार लाख थी…जबकि अमृतसर बॉर्डर से तीन लाख पचास हजार…गुरदासपुर से बार्डर पार करने वालों की संख्या दो लाख पचास हजार थी… इन्होंने 18 सितंबर से 29 सितंबर 1947 तक बार्डर पार कर भारत में प्रवेश किया…Pakistan के Mintgumri से हिन्दु सिख परिवार फाजिल्का और आसपास के क्षेत्र में आकर बस गए…इस तरह अन्य हिन्दु सिख परिवार Kasoor To Firozepur…Lahor to Amritsar और Narowaal to Dera Baba Nanak में आकर बस गये…आज भी विभाजन की टीस याद आते ही एक बारगी तो शरीर दहल उठता है…

 अगर उधर की आवाम…इधर की जनता…चाहे तो क्या नहीं हो सकता…सियासत भी चाहे तो…सबकुछ संभव है…इन्डो पाक महासंघ बन जाए…तो…विशाल भारत…दुनिया की सबसे बड़ी ताकत बनने की क्षमता रखता है…भारत में क्षमता है…एक बार फिर…सोने की चिडिय़ा बनने की…

Indo Pak Border

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