Indo-Pak Partition-6

विभाजन तो कई देशों में हुआ है…कई देशों को आजादी मिली है…बर्बादी तो हरेक देश में हुई…मगर जो कुछ भारत के विभाजन दौरान हुआ…वो किसी अन्य देश में नहीं हुआ…हत्याएं…दंगे…रेप…क्या नहीं हुआ देश के विभाजन के दौरान…जिसका दर्द विभाजन का डंक झेलने वालों की पीढीय़ां भी नहीं भूल पाई हैं…जब तक इतिहास रहेगा…शायद…भारत विभाजन का दर्द…बातें…चलती रहेंगे…विभाजन का दर्द हिन्दु…सिख और मुसलमानों…यानि…हरेक समुदाय ने झेला है…चाहे वो राइशजादा हो या गरीब…दर्द सबको मिला…इनमें एक मुहम्मद सरवर बोदला भी थे…जिन्होंने फिरोजपुर हलका मुहम्मदन से 1946 में विधानसभा चुनाव लड़ा था…वह Fazilka से करीब 10 किलोमीटर दूर Village Behak Bodla में रहते थे…आज उनके बारे में बात होगी।

उस समय इलाके में Muhammad sarwer bodla famous नाम था…या यूं कह लें…तूती बोलती थी…उनके अहलकार रह चुके S. Bishan Singh बताते हैं कि मियां बोदला के घर जब बेटी पैदा हुई थी…तब उन्होंने गांव की तरफ आने वाले हर व्यक्ति को 5-5 रूपये दिए थे…उपहार के रूप में…मियां बोदला ने पढ़ाई की थी…वलायत से…पढ़ाई पूरी करने के बाद जब वह रेलगाडी से फाजिल्का पहुंचे तो यहां उनके स्वागत के लिए लोगों की लंबी कतार लग गई थी…कटोरों में चाय व हलवा बांटा गया…यहां से उसे मोटर गाडी में बिठाकर गांव ले जाया गया।

जहां उन्होंने खुदा को सिजदा करने के लिए पक्की मसीत बनवाई थी…बताते तो यह भी हैं कि गांव Hasta Kalan to Behak Bodla तक एक सुरंग भी थी…कारण…बिशन सिंह बताते हैं कि मियां का चिश्तियों के साथ नहरी पानी को लेकर विवाद था…शहतीर वाला के पास थी नहर…चिश्ती कहते थे…पानी सिर्फ हमारे लिए है…बोदला कहते थे…पानी हमारे गांवों के लिए है…इस बारे में तो बात फिर किसी ब्लॉग में होगी…क्योंकि बात देश के विभाजन की चल रही है तो यह भी बता दूं। जो मुझे कुछ साल पहले संत राम इटकान ने बताया था…कि मियां बोदला ने D.S.P.Chownk Fazilka…इसके निकट एक हवेली का निर्माण करवाया था…हवेली निर्माणाधीन थी…देश के विभाजन की घोषणा हो गई।

मियां बोदला का अंग्रेजों में भी काफी प्रभाव था…फाजिल्का इलाके से भी प्रेम था…अफसरों पर भी दबदबा था…वह बोले…इलाका छोडक़र नहीं जाऊंगा…चाहे कुछ भी हो जाए…कई दिनों तक यहां रहे…आखिर S.D.M. Diwan Chand ने उसे सुरक्षा का वायदा किया…दवाब भी बनाया…फिर उन्हें Village Behak Bodla छोडऩा पड़ा…लंबी चौड़ी हवेली…हरे भरे खेत…हजारों की तादाद में पशु…सबकुछ यहां रह गया…हाँ, S.D.M. की तरफ से किये गए वायदे मुताबिक Gold और अन्य कीमती सामान (जो वो उठा कर ले जा सकते थे) लेकर दरिया तक पहुँचाया गया …वह अपनी पत्नी नवाबो और बेटी व अन्यों के साथ मोटर गाडी में बैठे…पूरा काफिला साथ था…Village Noor Shah के निकट…दरिया गुजरता था…उसका एक किनारा भारत के साथ…दूसरा किनारा पाकिस्तान के साथ…वह मोटरगाडी पर दरिया तक पहुंचे…वहां काफी समय तक रोए…फिर धरती को सिजदा किया और किश्ती में बैठकर चल दिए… … उनकी मोटर गाडी बरसों तक उस गांव की फिरनी पर खड़ी रही…मगर वो पहुंच चुके थे…एक नए देश Pakistan …जहां वह 7 may 1951 to 14 oct 1955 तक पाकिस्तान पंजाब विधान सभा के सदस्य (M.L.A,) बने…Muslim reserve seat -5 Mintgumri से…पाकिस्तान सरकार ने उसे Hakam-a-Allah of the khaksar Tehreek in Punjab के खिताब से नवाजा…कहते हैं कि पाकिस्तान में उसे काफी भूमि व हवेलियां भी दी थी…जहाँ वो रहे…मगर यहाँ…उन की हवेलियां… बनकर रह गई सिर्फ और सिर्फ… मलबे का ढेर … वह Village Behak Bodla में आज भी मौजूद है।
