पानी की जगह कुंओं मे देखा लाशों का ढेर तो दहल उठा काफिला

Indo-Pak Partition-7

Guraditta Ram Jasuja

जीवन में मैं कई ऐसे बुजुर्गों से मिला हूं, जिन्होंने भारत का विभाजन देखा हैउनसे देश के विभाजन की बात करते हैं तो याद करते हुए दहल उठते हैंबटवारे की टीस से से उनकी आंखें एक बार फिर से अश्कों से भर जाती हैंखून से सनी सडक़ें जो देखी थीहत्याएं होती देखी थीमहिलाओं को कुंओं में छलांग लगाते हुए देखा थाटीस तो उठनी ही थीऐसे दृश्य तो सबको रूला देते हैंफिर जिसका गला सूखा रहा होपानी की बूंद बंूद को तरस रहा होअचानक दूर से पानी का नाला नजर आएजाहिर हैप्यास बुझाने के लिए वो दौडक़र पानी के नाले की तरफ जाएगीअगर वहां उसे पानी तो मिले, लेकिन खून से लबालबतब उसके दिल पर क्या गुजरती होगीसाथ ही अगर बच्चा होउसे भी प्यास लगी होबच्चा रोरोकर बोल रहा होमांमांपानीपानी दो मांमेरा गला सूख रहा हैतब यह दर्दवो मां ही जानती हैया वो लोग जानते हैंजिन्होंने वो समय और मंजर देखा होऐसा ही देखा था शाहमद वट्टू गांव तहसील दीपालपुर जिला मिंट गुमरी (पाकिस्तान) से भारत विभाजन दौरान उजडक़र आए गुरांदित्ता राम जसूजा नेउनकी दर्द भरी यह दास्तां वाक्य ही रौंगटे खड़े कर देने वाली हैदेश का बटवारा हुआतो वह 24 साल के युवा थेतीन भाई एक बहन से बड़े गुरांदित्ता राम की माता चंदा देवी और पिता सुंदर दास जसूजा ने भी विभाजन दौरान नहीं सोचा था कि जिस घर को वह छोड़ रहे हैंवहां कभी लौटकर नहीं आएंगेसोचा थाएक दो सप्ताह बाद सब शांत हो जाएगामगर कुछ दंगो ने डरा दियाप्रशासन नेशाहमद वट्टू गांव और आसपास के वो मुसलमान भी दुश्मन बन गएजिनके साथ कभी अच्छे रिश्ते थेदोस्ती थीऔर प्यार थाविभाजन ने सबकुछ नष्ट कर दियाविभाजन की आग ने दोस्ती देखी पड़ोसी देखाकहीं दंगे उन पर भारी पड़ जाएंइसलिए वहां से निकलना ही बेहतर समझा

1. Kapil Jasuja(Grandson) 2. Krishan Lal Jasuja(Son)3.Guraditta Ram Jasuja, Hridhaan(Granson)

       उनकी शिक्षा दीक्षा बंटवारे से पहले पाकिस्तान में अपने जन्म स्थली गांव के स्कूल में ही हुईजहां उन्होंने तीन कक्षायें उर्दू और दरबार साहिब की चौकीविभाजन हुआ तो 1952 में हिंदी रतन और 10वीं की पढ़ाई मुकम्मल कीउन दिनों फाजिल्का के ऊन बाजार के राम मंदिर में कक्षायें लगती थीउनका विवाह सरदारी लाल नागपाल के घर जन्मी पार्वती  के साथ उनका विवाह गांव हैड सुलेमानकी में हुआदो दिन तक बारात वहां रूकीएक दिन लडक़ी वालों के घर और दूसरे दिन गांव के जैलदार जैमल खां के घर उनके आग्रह पर रूकी…(हैड सुलेमान के बारे में किसी दिन ब्लॉग में ही बताया जाएगा)

Gaurav Jasuja, Hridhaan, Guranditta Ram Jasuja

वह बताते हैं कि उनके पास बैलगाडी, घोड़ा या मोटर गाडी नहीं थी…विभाजन हुआ…वह परिवार सहित पैदल ही चल पड़े…खाली हाथ…कुछ आटा…घी वगैरा था…पता नहीं था…कहां जाना है…न कोई मंजिल…न ठिकाना…चल पड़े भगवान के सहारे…कच्चा रास्ता था…कहीं लाशें मिली तो कहीं कटे हुए हाथ…पांव…धड़…सिर…कहीं कुंआ लाशों से भरा हुआ था…बस जुबान पर एक ही शब्द था…हे भगवान…किसी ठिकाने पर पहुंचा दे…आखिर वह पहुंच गए…एक शरणार्थी कैंप में…जो कुछ मिला…भगवान का प्रसाद समझ कर खा लिया…बाद में गांव जंडवाला में मेहनत मजदूरी कर अपना व परिवार का पालन पोषण किया…उस समय 3 रुपये प्रति दिहाड़ी मिला करती थी…उन्होंने गांधी चौंक पर कंडा लगाया…तूड़ी तोल कर बेचनी शुरू की…दो बरस तक गरीबी के घेरे न बांधे रखा…बाद में डीएफएसओ चौ. लाल सिंह ने 1952 में उन्हें डिपो की अलाटमैंट कर दी…2338 रुपये भारत सरकार को देकर उन्होंने अपनी करियाने की दुकान की रजिस्ट्री करवाई…26 अक्तूबर 2003 उनकी धर्मपत्नी पारवती देवी का निधन हो गया…बड़े बेटे शाम लाल का 31 दिसंबर 2011 को निधन हो गया…96 वर्ष की आयु…नजर व दांत एक दम सही सलामत…सुबह 4:30 बजे उठने का नियम है…कोई नशा नहीं…वह अपने पुत्र कृष्ण लाल जसूजा बहु सुषमा रानी, पौते पौतियों व पड़पोत्र के साथ हंसी खुशी अपना जीवन व्यतीत कर रहे हैं। (Writer-Krishan Taneja 92566-12340)

Writer Krishan Taneja with Guranditta Ram Jasuja

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