
इन दिनों कुदरती प्रकोप के कारण पंजाब को अरब से अधिक रूपये का आर्थिक नुकसान हो चुका है…कई लोग बेघर हो गए…कई पशु मर गए…कईयों के सपने बिखर गए…बर्बाद का यह सिलसिला काफी लंबे समय से जारी है…जब तक सरकारें इसका स्थायी समाधान नहीं निकालेंगी…तब तक बर्बाद का यह सिलसिला जारी रहेगा…चलो खैर, हम अपने इलाके की बात करते हैं।

बात अगर 18वीं सदी से शुरू करें तो उस समय फाजिल्का के वाण बाजार तक सतलुज दरिया बहता था…जिसका पहला प्रकोप 1881 में हुआ…इसके बाद 1882-1883 में 13.1 इंच बारिश हुई…इसके बाद 1903 में 25 इंच बारिश हुई…उस समय सतलुज दरिया में रिकार्ड से 3 फीट ऊंचा पानी चढ़ गया और पानी फाजिल्का में फैल गया…

इसके बाद 1908 में भी कहर बरपा…31 अगस्त 1908 के दिन फाजिल्का में 182.9 मिलीमीटर की रिकॉर्ड बारिश हुई थी…दरिया में जलस्तर बढ़ा और एक सितंबर के दिन दरिया ने फाजिल्का को अपनी चपेट में ले लिया…जिससे डेन अस्पताल (सिविल अस्पताल) …डाक बंगला (पोस्ट आफिस) …अंग्रेजों का बंगला (मौजूदा डीसी निवास) …मुनसिफ कोर्ट (तहसील परिसर) … स्टेशन और पुलिस स्टेशन जैसी मजबूत इमारतें धाराशायी हो गई…उस समय लाखों रूपये का नुकसान हुआ…

देश का विभाजन हुआ तेा एक साल बाद ही दरिया ने फिर कहर बरपाया…पानी फाजिल्का में तबाही मचा गया…1955 की बाढ़ हो या 1988 की…फाजिल्का में काफी नुकसान हुआ…वैसे इस समय फाजिल्का में बाढ़ की स्थिति नहीं है…हां…जहां बाढ़ है…वहां पीडि़तों की मदद की जरूरत है। (Lachhman Dost- W. 99140-63937)
