India में Fazilka, Pakistan में Faisalabad की एक जैसी है यह धरोहर

Photo- opening cereony (Clock Tower Fazilka)

मुगलकालीनब्रिटिश भारतीय भवन निर्माण कला और वास्तुशैली के घटकों का अनूठा संगमघंटाघरशहर की सुंदरता की एक खूबसूरत पेशकशशहर के मध्य में स्थित होने के कारण यहां से रोजाना हजारों लोगों का आवागमन होता है तो वह घंटाघर को देखकर देश की एक अनूठी धरोहर या अजूबा मानते हैंआवागमन के चलते ही सियासी सामाजिक अन्य संस्थाओं ने इसे धरने, प्रदर्शन का स्थान बना दिया हैइसकी चर्चा दूरदूर तक हैयही  कारण है कि इसकी तस्वीर पंजाब विधान सभा की आर्ट गैलरी में सजाई गई हैइस कड़ी में ही फाजिल्का को जिला बनाने की मांग को लेेकर यहां धरना, रैली और अनशन किया गया।

Seth Shopat Rai Periwal

        बात 1936 की हैजब इसका निर्माण शुरू हुआ और यह 6 जून 1939 के दिन बनकर तैयार हो गयाराम नारायण पैड़ीवाल की स्मृति में स्थापित घंटा घर का असली नाम राम नारायण क्लॉक टावर हैजिसे राय साहेब मदन गोपाल पेड़ीवाल और सेठ श्योपत राय पेड़ीवाल ने शहर की जनता को समर्पित कियाजिला फिरोजपुर के डीसी एम.आर.सचदेव ने इसका उद्घाटन कियाजबकि इस मौके पर आयोजित समारोह की प्रधानगी शीपशैंक्स एस्कवायर आईसीएस कमिश्नर जालंधर डिवीजन, एमए पीसीएस एसडीओ फाजिल्का राय साहिब लाला विद्याधर और नगर कौंसिल के प्रधान सेठ श्योपत राय ने कीइसके निरीक्षणकर्ता मो. अब्दुल करीम और मैंमरान पब्लिक वर्कस सब कमेटी फाजिल्का लाला करम चंद सेठ जेस राज थेसेकेट्री मनोहर लाल धौन और ठेकेदार . नारायण सिंह थेमिस्टर एस.डी. वासन भवनकला निुपण थेउनकी कला ने ईंटो की चिनाई से अनूठी इमारत 95 फीट (करीब 29 मीटर) यानि घंटा घर का निर्माण कर दियाउस समय क्षेत्र में हिन्दी, पंजाबी, अंग्रेजी और उर्दू भाषा मशहूर थीइसका पता इससे चलता है कि घंटा घर के चारों ओर चारों भाषाओं में घंटा घर का उद्घाटन बोर्ड लगाया गया हैयानि जिसको जिस भाषा का ज्ञान है, वह इस बारे में जानकारी हासिल कर सकता हैगोल चक्कर के बीच निर्मित घंटा घर में स्वच्छ हवाओं का प्रवेश हो, इसके लिए चारों दिशाओं में दरवाजे हैंऊपर तीन कमरों के बीच से घूमावदार 82 सीढिय़ां हैंजिस पर चढक़र करीब 88 फीट तक ऊपर जाया जा सकता हैऊपर चढक़र शहर को कोनाकोना देखा जा सकता हैयहां भी एक बरामदा बनाया गयासीढिय़ा चढ़ते वक्त घंटा घर के चारों दिशाओं में लगे घंटे की मशीन कमरों के बीच सजाई गई है।

Seth Madan Gopal Periwal

        ऐसा ही क्लॉक टावर पाकिस्तान के लायलपुर शहर में है…फाजिल्का और पाकिस्तान के जिला लायलपुर (अब फैसलाबाद) में निर्मित Clock Tower मुगलकालीन, ब्रिटिश और भारतीय भवन निर्माण कला व वास्तुशैली के घटकों का अनोखा समिम्मलन होने के अलावा और भी कई समानताएं है…दोनों घंटा घर शहर के मध्य में निर्मित हैं…लायलपुर ब्रिटिश सरकार के समय पंजाब के गवर्नर सर जेम्स लायल ने सन् 1880 में शहर आबाद किया और इसका नाम अपने नाम पर लायलपुर रखा…उनकी जिंदगी का सफर भी लायलपुर में ही पूरा हुआ…उनकी समाधि लायलपुर के कम्पनी बाग में ही है… दोनों शहरों ने बीसवीं सदी की शुरूआत में उन्नती की है… घंटा घरों में फर्क सिर्फ यह है कि लायलपुर घंटाघर के आसपास आठ बाजार हैं…जबकि फाजिल्का के घंटाघर के आसपास चार बाजार हैं…फाजिल्का के घंटाघर के उत्तर की तरफ सर्राफा बाजार है। जो अन्य मौहल्लों के अलावा मौजम रेलवे फाटक से जोड़ता है। वहां से मार्ग सरहदी गावों को जोड़ता है। जबकि दक्षिण की ओर सडक़ 50 मीटर की दूरी के बाद दो टुकड़ों में बंट जाती है। वहां से एक सडक़ पूर्व की ओर गली गीता भवन को जाती है और दूसरी सडक़ पश्चिम की तरफ नामधारी मार्किट की तरफ जाती है…विभाजन से पूर्व यहां मुस्लमानों की बड़ी सरां थी…उधर घंटाघर के पूर्व में होटल बाजार है…जो गौशाला रोड़ से होकर अबोहर-फिरोजपुर मार्ग को जोड़ता है…होटल बाजार रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, मलोट रोड और फिरोजपुर रोड को जोडता है…होटल बाजार का एक रास्ता साइकिल बाजार से जुडता है…जहां से मौजम रेलवे फाटक तक पहुंचा जा सकता है… यही मार्ग सिविल अस्पताल और रेलवे स्टेशन को जोडता है…इस मार्ग से साधु आश्रम रोड पर भी पहुंचा जा सकता है… उधर घंटाघर के पश्चिम की तरफ जण्ड बाजार है, जो मेहरियां बाजार से अबोहर रोड से जुड़ता है…जण्ड बाजार कॉलेज रोड़ से होकर सुलेमानकी बॉर्डर को जोड़ता है…चारों दिशाओं में किसी भी दिशा में खड़ा व्यक्ति घंटाघर चौंक में पहुंच सकता है।

        इस तरह लायलपुर (Faisalabad) के हर बाजार का अपना नाम है…शहर के आठ बाजारों के आठ नाम हैं। Kachehri Bazar… Rail Bazar..Karkhana Bazar…Mintgumri bazar …Jhung Bazar …Bhawna Bazar…Ameenpur Bazar or Chniot Bazar हैं…Layalpur का नक्शा ब्रिटिश सरकार के कब्जे अधीन क्षेत्र के कलोनिल अधिकारी कैप्टन पोहम यंग ने बनाया था। विश्वास किया जाता है कि यह क्लॉक टावर क्वीन विकटोरिया की याद में बनाया गया है…यह नक्शा ब्रिटेन के राष्ट्रीय झंडे यूनियन जैक को मद्देनजर रखकर (यूनियन जैक जैसा) बनाया गया है…जो आर्कीटेक देसमंड यंग ने डिजाइन किया था…मगर हकीकत में यह माना जाता है कि इसका डिजाइन उस समय के मशहूर टाऊन प्लानर सर गंगा राम ने बनाया था। ब्रिटेन के राष्ट्रीय झंडे जैक में आठ लाइनें हैं…इन आठ लाइनों का केन्द्र एक है और यह आठ तरफ बिखरे हुए हैं… ऐसे ही लायलपुर का घंटाघर है…यदि यह विमान या हैलीकाप्टर में बैठकर फिजा से नीचे लायलपुर का घंटाघर और आठ बाजारों का दृश्य देखें तो यह ब्रिटेन का यूनियन जैक जैसा ही प्रतीत होता है…लायलपुर का घंटाघर सिक्ख जमींदारों और जगीरदारों से फंड एकत्रित करके बनाया गया था…यह फंड 18 रूपए एक मुरब्बे के हिसाब से वार्षिक एकत्रित हरके टाऊन कमेटी को दिया जाता था और टाऊन कमेटी ने घंटाघर बनाया था…इस घंटा घर का नींव 14 नवंबर 1903 में सर जेम्स लायल ने रखी…जहां यह घंटा घर बनाया गया है, वहां पहले कुँआ था जबकि फाजिल्का में भी घंटा घर के निकट कुँआ था…लायलपुर का घंटा घर 1906 में आगरा के ताज महल बनाने वाले कारीगर से तालुक रखने वाले गुलाब खान की देखरेख में बनकर तैयार हुआ, जिस पर 40000 रूपये की लागत आई…इसकी घड़ी बम्बई से खरीदी गई। उदघाटन के समय पंजाब के वित्त कमीश्नर मिस्टर लुइस गेस्ट ऑफ ऑनर थे। (जारी) (Lachhman Dost Whats app 99140-63937)

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