Clock Tower के पीछे छिपी है दर्दभरी दास्ताँ

View From Periwal HAVELI

एक वक्त था, जब शहर का समय क्लॉक टावर तय करते थे…शहर और आसपास के ग्रामीण (जहां तक क्लॉक की आवाज जाती थी) अपनी दिनचर्या निर्धारित करते थे…घडिय़ाल की घनघनाहट जब होती तो हर व्यक्ति सतर्क हो जाता…घडिय़ाल एक एक घंटे बाद समय दोहराता है…समय जितना होता, घडिय़ाल उतनी बार बजता…यानि दस बजे तो घडिय़ाल …10 बार बजता है…अपनी वास्तुकला के सौंदर्य के लिए भी क्लॉक टावर मशहूर हैं…भले ही आज मोबाइल का युग है…मोबाइल ने घडिय़ों का कारोबार लगभग बंद कर दिया…घड़ी तो कम लोग ही देखते हैं…इसके बावजूद क्लॉक टावर के घडिय़ाल की आवाज कईयों को सुबह जगाती है…

Inaugaration Board

    फाजिल्का के घंटा घर पर जो घडिय़ाल लगाया गया हैवो इंगलैड के शहर बिर्मिघम से मंगवाया गया था। यह भी बता दूं कि घंटा घर को बनाने के लिए करीब तीन साल का समय लगा था और इस पर करीब 22000 रूपये खर्च हुआ था।

Painting

  फाजिल्का का घंटा घर क्यों बनाया गयाइसके पीछे एक दर्दनाक दास्तान छुपी हुई है। बताते चलें कि फाजिल्का के सेठ किशोर चंद पैड़वाल देश के अमीरों में एक थे उनके पोते और सेठ किशन चंद के सुपुत्र राम नारायण पैड़ीवाल की याद में यह घंटा घर बनाया गया हैइसके पीछे दर्दनाक दास्तां यह है किजिनके नाम पर घंटा घर बनाया गया है यानि सेठ राम नारायण पैड़ीवाल के घर लडक़ा नहीं थाएक बेटीनर्मदा थीजवानी में ही राम नारायण का निधन हो गया

Edward Memorial Ladies Hospital Fazilka

   इस दर्द से पैड़ीवाल परिवार के साथ साथ इलाके लोगों को भी काफी सदमा पहुंचाक्योंकि पैड़ीवाल परिवार काफी दानवीर थालोगों का भला करता थाबताते हैं कि एक बार यहां से अंग्रेज कुछ मजदूरों को पकड़ कर ले जा रहे थे तो इसकी सूचना जब सेठ मदन गोपाल को लगी तो वह कचहरी पहुंचे और बोलेयह मजदूर मेरे इलाके के हैंइन्हें छोड़ दोजो मजदूरी का पैसा होगा...वह मैं अदा करूंगाउन्होंने पैसा अदा भी कियाएक और भी दास्तान बताते हैं कि सेठ मदन गोपाल सुबह सुबह जब जाते थे तो उनकी जेब में सिक्के होते थेमगर जब घर लौटते तो जेब खालीकहां जाते थे वो सिक्केवो सिक्के गरीबों में बांट दिए जाते थेदयालु थे सेठ मदन गोपाल जीरास्ते में गरीबों में सिक्के बांट देते थे।

Narmda

   इस तरह राम नारायण पैड़ीवाल भी काफी दयालु थेमगरयुवावस्था में उनका निधन हो गयाउनकी याद में पैड़ीवाल परिवार की ओर से फाजिल्का के सिविल अस्पताल में जनाना अस्पताल बनाया गया थायह बात 1914 की हैजनाना अस्पताल का नाम थाएडवर्ड मेमोरियल जनाना अस्पतालजिस पर करीब 10,500 रूपये खर्च किए गए थेमगर 2011 में यह इमारत गिरा दी गई।    

       बात को जारी रखते हुए बता दूं कि ब्रिटिश साम्राज्य में कानून था किबेटी को पिता पुरखी जायदाद का वारिस नहीं माना जाएगा…जब सेठ किशोर चंद की जायदाद का बटवारा हुआ तो अंग्रेजों ने एक फैसला किया…जिसके तहत जायदाद का वारिस राम नारायण की बेटी नर्मदा की बजाए सेठ मदन गोपाल और सेठ श्योपत राय को बनाया गया…ब्रिटिश साम्राज्य में यही कानून था…मगर एक शर्त जरूर रखी गई … वो शर्त यह थी …कि …सेठ राम नारायण की याद में कोई ऐसी धरोहर बनाई जाए…जिसे इलाका निवासी हमेशा याद रखें…कई दिन तक ऐसी धरोहर बनाने के लिए विचार चलते रहे…वहीं अंग्रेज समय के भी पाबंद थे…उन्होंने कहा कि शहर के बीचो बीच क्लॉक टावर बनाया जाए ताकि हर व्यक्ति को समय का पता चल सके…

Clock Machine

फैसला हुआ…सेठ राम नारायण की याद में राम नारायण घंटा घर बनाया जाए…इसका नक्शा तैयार हुआ और सेठ मदन गोपाल पैड़ीवाल व सेठ श्योपत राय पेड़ीवाल ने इसका निर्माण शुरू करवा दिया…निर्माण जारी था…अचानक एक और सदमा…एक गहरा दर्द…पहले सेठ राम नारायण का निधन तो अब…क्लॉक टावर के निर्माण दौरान… सेठ मदन गोपाल का निधन हो गया। खैर…क्लॉक टावर का काम मुकम्मल हो गया…फिर आया 6 जून 1939 को दिन…उस दिन घंटा घर का उद्घाटन किया गया…इस दौरान शहर के सभी लोगों को न्यौता दिया गया…उधर नर्मदा की शादी की गई तो उसे 400 एकड़ भूमि गांव कबूलशाह खुब्बन में दी गई।(Lachhman Dost, Whats app No. 99140-63937)

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