
बंगले की रौनक बढ़ चुकी थी…ब्रिटिश अधिकारियों को आना जाना तेज था…मगर उनके मनोरंजन…खेल आदि के लिए कोई कक्ष नहीं था…1913 में बंगले के निकट और सिरसा से मुलतान तक जाने वाली लंबी सडक़ के किनारे एक सुंदर कक्ष का निर्माण किया गया…जिसका नाम रखा गया …The Bosworth Smith Recreation Club..फाजिल्का में बंगला और रघुवर भवन के अलावा यह तीसरी धरोहर है, जिसे Govt of Punjab के department of tourism and cultural affairs की तरफ हैरीटेज का दर्जा दिया जा चुका है।

इमारत छहभुज नीव आधार पर बनाई गई…जो खुद में एक ऊंचे मंच पर बनाई होने की झलक देती है…इसकी नींव प्रत्येक कोने से उठने वाली आर्चद्वार और दीवारें इमारत को पर्याप्त संतूलन देती हैं…इस गोलाकार इमारत को मोटी दीवारों से बनाया गया है…जिन पर पक्की ईंटे लगाकर चूना व सुरखी से चिना गया है…कल्ब की इमारत महलनुमा और गोलाकार होने के कारण इसे गोल कोठी के रूप में अधिक जाना जाता है…इमारत के उत्तर से दक्षिण दिशाओं तक आर्च कन्ट्रक्शन शैली में प्रवेशद्वार बनाए गए हैं…जिनकी संख्या 18 है…विजय और हर्ष का प्रतीक स्तम्भों को गुलाबी रंग दिया गया है…प्रत्येक फलक में आर्च कंट्रक्शन से निर्मित द्वारों के आगे तीन सीढिय़ां बनाई गई हैं…जहां से कल्ब के गलियारे में प्रवेश होता है…मुख्यद्वार के साथ लगते द्वारों में समानता है..

. इनमें फर्क सिर्फ यह है कि बाकी द्वार मुख्यद्वार से छोटे हैं…किसी भी द्वार से इमारत के गलियारे में पहुंचा जा सकता है…गलियारे में पैदल पथ बनाया गया है… जहां से इमारत के उत्तर से दक्षिण तक घूमा जा सकता है…गलियारे की खास विशेषता यह है कि गलियारे में सर्दी के मौसम दौरान धूप और गर्मी के मौसम में ठंडी छांव का लुत्फ उठाया जाता है…केन्द्र में छहभुज कक्ष का निर्माण किया गया है…जसके उत्तर और पूर्व दिशा की ओर दो द्वार बनाए गए हैं… केन्द्र कक्ष में हवा और रोशनी का तालमेल बिठाने के लिए रोशनदान और जालीदार खिड़कियां सजित हैं…केन्द्र कक्ष में पश्चिम की ओर एक जालीदार द्वार है… जहां से साथ लगते दो छोटे कक्षों में प्रवेश होता है…एक छोटे कक्ष में प्रवेश करने के लिए गलियारे के उत्तर दिशा की ओर भी द्वार बनाया गया और दूसरे छोटे कक्ष के प्रवेश के लिए केन्द्र कक्ष का जालीदार द्वार और दक्षिण दिशा में द्वार हैं…इनका एक-एक द्वार पश्चिम की ओर भी खुलता है…इनके साथ 16 घुमावदार सीढिय़ां है…जिनके जरिए इमारत की छत्त पर पहुंचा जा सकता है…गलियारे की छत्त पर आठ गुम्बद सजित हैं और केन्द्र कक्ष की छत्त पर छह गुम्बद हैं…जिन्हें कमल के फूल में सजाया गया है…जो मुगलकालीन, हिन्दु और ब्रिटिशशैली के घटकों का एकीकृत संयोजन है…

इस इमारत में Virast Bhawan भी बनाया गया…जिसमें स्कूल से मिली और लोगों की तरफ से दी गई ऐतिहासिक चीजें सजाई गई हैं…वहीं इस सुंदर इमारत सहित दो अन्य इमारतों को हैरीटेज का दर्जा दिलाने के लिए मौहल्ला Nai Abadi Islamabad, Teacher Calony, Basti Chandoran or Dhingra Calony के लोगों की तरफ से लगातार एक माह तक आंदोलन किया गया…इसके बाद इसे पंजाब सरकार की तरफ से हैरीटेज का दर्जा मिला…पांच कनाल जगह हैं…और यह धरोहर लडक़ों के सीनियर सैकेंडरी स्कूल फाजिल्का में है…मगर हैरानी की बात यह है कि हैरीटेज प्राप्त इस धरोहर की संभाल के लिए पंजाब सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया।
