
भारत विभाजन से पहले और कुुछ साल बाद तक फाजिल्का शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़ा हुआ था…फिर भी समाचार जानने या सुनने की जिज्ञासा मन में विद्यामान थी…समाचारों की प्रगति ने समस्त क्षेत्र को एक परिवार सा बना दिया…इन समाचार पत्रो ने हमें दैनिक कार्य से निवृत होकर संसार की प्रत्येक समस्याओं, समाचारो से अवगत कराया और समस्त सूचनाएं हम तक पहुँचाई…हम वास्तविकता से सरल और सहज ही में परिचित होते रहे…विज्ञापनों के जरिए हमारा बाजार भी विकसित हुआ…सूर्योदय होने से पहले समाचार-पत्र हाथ में आया, तो सारा काम छोड़ कर समाचार-पत्र की महत्वपूर्ण खबरें पढ़ीं…पता चला कि बीते दिन क्षेत्र में क्या गतिविधियां रहीं, घटना-दुर्घटना की जानकारी मिली…राजनीतिक पार्टियों, धार्मिक व सामाजिक संस्थाओं और व्यापारिक संस्थाओं की गतिविधियों की जानकारी मिली…तब मन को संतुष्टि मिली कि फाजिल्का के इतिहास में यहां के समाचार-पत्र अपना अहम् योगदान अदा कर रहे हैं…समाचार-पत्र जिन्दगी का एक हिस्सा बन गए हैं…घर बैठे महत्वपूर्ण जानकारियां मिलीं, रोजगार के लिए रिक्त स्थानों का पता चला तो नया रिश्ता ढूंढने में भी सहायता मिली…चुटकुले व कहानियों ने मनोरंजन किया तो मन खुशी से झूम उठा…ज्ञान में और वृद्धि हुई। समाचार-पत्रों ने ज्ञान के साथ-साथ फाजिल्का के इतिहास की जानकारी दी। आश्चर्यजनक बात तो यह है कि यहां हिन्दी व उर्दू समाचार-पत्र बराबर चलते रहे हैं…आजतक फाजिल्का से कई समाचार-पत्र प्रकाशित हुए, जिनमें हिन्दी और उर्दू भाषा के अधिक समाचार पत्र हैं…क्योंकि पहले उर्दू भाषा अधिक प्रसिद्ध थी…दरअसल, फाजिल्का क्षेत्र के लोग पहले उर्दू काफी जानते थे…मगर अब न उर्दू की शिक्षा देने वाले शिक्षक रहे और न ही शिक्षा लेने वाले विद्यार्थी। शिक्षा कम हुई तो उर्दू के समाचार-पत्र भी बंद हो गए…एक ज़माना था जब उर्दू के समाचार-पत्रों ने खासी ख्याति हासिल की…यहां से समाचार-पत्र का प्रकाशन तो भारत-पाक विभाजन से पूर्व ही हो चुका था…फिरोजपुर से फाजिल्का में समाचार-पत्र प्रकाशित करने के लिए समाचार-पत्र फाऊंटेन ने 1941 में रजिस्ट्रेशन ली…मासिक समाचार-पत्र जो चारों भाषाओं यानि हिन्दी, अंग्रेजी, पंजाबी व उर्दू में प्रकाशित होता था, लेकिन विभाजन के बाद ये समाचार-पत्र बंद हो गया…इसके अलावा बिजली और निशात समाचार पत्र भी निकाले गए, जो लाला हरि कृष्ण दास प्रकाशित करते थे…उसके बाद ओम प्रकाश बांसल ने उर्दू का मोती समाचार-पत्र सन् 1960 में प्रकाशित किया गया, जो साप्ताहिक था… 1972 का वर्ष तो अखबारों के नाम …तब यहां तीन समाचार-पत्र प्रकाशित हुए… एक था, रफीक-ए-खालिक तो दूसरा था खादम…उर्दू भाषा में प्रकाशित हुए…गोविंद राम का रफीक-ए-खालिक साप्ताहिक था…खादम की शुरुआत पत्रकार हरशरण सिंह बेदी ने की… वे स्वयं इसके चीफ एडिटर थे और सलाहकार-कम-सह संपादक एडवोकेट नरिन्द्र मोहन भैय्या थे… इसका उद्घाटन किया था कँवर लजिन्द्र सिंह बेदी… इस वर्ष ही मजदूर हितकारी का आगाज हुआ…15 मई 1978 को धर्म लूना ने बहुभाषी पाक्षिक समाचार पत्र फाजिल्का पोस्ट प्रकाशित की…इसके अलावा अमरजीत सिंह ने लोक रिपोर्टर मासिक पंजाबी और जसवंत सिंह बेदी ने पखंड साप्ताहिक प्रकाशित की…इसके बाद 21 मार्च 2004 के दिन फाजिल्का में दैनिक सरहद केसरी समाचार पत्र शुरू किया गया…इस समय फाजिल्का शहर से एक मात्र रंगदार दैनिक समचार पत्र सरहद केसरी प्रकाशित हो रहा है।
