फिल्म शूटिंग करनी है तो आइये बॉस, अनुकूल जगह भी है-परिस्थितियां भी

यह देश का अंतिम छौर नहीं…देश यहां से शुरू होता है…सिर्फ भारत ही नहीं…दूसरी तरफ देखें तो पाकिस्तान भी यहां से शुरू होता…भारत पाक की सरहद है न बॉस…इसलिए दोनों देश यहां से शुरू होते हैं…कई फिल्में हैं सरहद पर बनी हैं…वो फिल्में चाहे देश भक्ति की हों या दोनों देशों की लव स्टोरी या जसूसी वगैरा की…मगर वो फिल्में तो आर्टिफिशियल सैट लगाकर बनी हैं…यहां तो असली है…सरहद भी…बड़ी बड़ी हवेलियां भी…हरे भरे खेत…सतलुज दरिया…शहीदों की स्मारक…आसफवाला…खासकर ऐसा गांव…जो तीन तरफ से पाकिस्तान में घिरा हुआ है और चौथी तरफ दरिया है…फिर क्या कमीं है…

Shiju Kataria

यहां पहले फिल्में बन चुकी हैं .. वो फिल्म चढ़दा सूरज हो या फिर चौधरी हरफूल सिंह जाट…अगर देश भक्ति पर फिल्म बनाएं तो सबसे बेहतर फिल्म यहां बन सकती है…फाजिल्का देश का एक ऐसा क्षेत्र है जहां अनेक राज्यों के जवानों ने शहादत दी है…उनकी याद में बना है शहीद स्मारक…आसफवाला…तीन तरफ से पाक में घिरा गांव भी देश का एक मात्र गांव मुहार जमशेर है…यह भी बता दूं कि अभिनेत्री शिजू कटारिया तो यहां फिल्म बनाने की बात कह भी चुकी हैं…फिर दूसरे निर्माताओं की देरी क्यों ?

Choudhary Harphool Singh Jaat- The First Colour Movie in Fazilka

Producer/Director/Actor Ch. Atma Ram Kamboj with actress Malti

Fazilka- which was known for its Asia’s biggest cotton industry before partition had nothing to do with tinsel world ever. It is far from Tinsel City, Mumbai. None can think even in dream that the gorgeous actresses with the heroes of glittering world would visit this tiny, outdated city and shoot the movie. Even after the 72 years of independence, only one movie has been shot here in the year of 1973 which was based on the martyr of adjoining state Haryana “Harphool Singh Jaat”. Actor Anand Kumar had played a role of protagonist in the movie with female co-partner gorgeous Malti, niece of Tinsel world’s dream girl Hema Malini with the second lead actress Jai Shree Tee. Aatma Ram Kamboj who was both the producer & director of the movie too had played a significant role in the movie. The role of the British Officer was played by Kamal Kapoor. In 1973, it was shot in Sajrana & Salem Shah villages apart from some shooting in Mumbai & Kurkshetra. The movie was released in the year of 1974.

Punjabi Film – Charda Suraj

अगर फिल्म चढ़दा सूरज की बात करें तो उसकी शूटिंग फाजिल्का में भी हुई थी…हरकृष्ण लाल कंबोज द्वारा बनवाई इस फिल्म में guest app Mr. Pal patrian wala or Shivani , Surinder shinda, Shivendar mahal, Ajay Deol ,Suman datta ect artist.

One of the biggest Hindi film hits in its decade “Anarkali”, a 1953 Hindi historical drama based on the historical legend of the Mughal emperor Jahangir was the first movie released in “Raja Cinema, Fazilka” on 24th July 1953.

“Amar Akbar Anthony” was the first hindi movie screened in Sanjeev Cinema, Fazilka on 23rd December 1977

Bollywood Actress ‘Chandni’
Chandni is the grand daughter of Late Pandit Het Ram Sharma (Former Administrator Of G.D School Abohar). Chandni has appeared in Bollywood movies like ‘Sanam Bewafa’, (1991), Henna (1991), Umar 55 Ki Dil Bachpan Ka (1992) …. , Jaan Se Pyaara (1992), 1942: A Love Story (1993) …., Ikke Pe Ikka (1994), Aaja Sanam (1994), Jai Kishen (1994) …., Mr. Azaad (1994) (as Chandini) …. , Hahakaar (1996) (as Chaandni) ….
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बालीवुड के बादशाह अमिताभ बच्चन के पिता स्व. श्री हरिवंश राय बच्चन ‘अबोहर’ शहर के ‘साहित्य-सदन’ में 29 दिसंबर सन् 1941 में हुये ‘अखिल भारतवर्षीय हिन्दी साहित्य सम्मेलन’ के तीसवें अधिवेशन के लिए आमंत्रित किये गए थे I यही पर उनकी और तेजी सूरी(बच्चन) की पहली मुलाकात ‘अबोहर सर्किट हाउस’ में हुई थी I पहली ही बार में हरिवंश राय बच्चन जी तेजी की ख़ूबसूरती के दीवाने हो गए थे I बाद में दोनों ने 1941 में अल्लाहाबाद में शादी रचा ली थी I ‘अबोहर सर्किट हाउस’ हरिवंश राय श्रीवास्तव (बच्चन) एंव तेजी सूरी (बच्चन) के प्यार का मुख्य गवाह बना I  इस सम्मलेन का एक कारण था I हिंदी साहित्य सम्मेलन के वार्षिक अधिवेशनों की अध्यक्षता भारतवर्ष के सुप्रसिद्ध साहित्यिकों, प्रमुख राजनीतिज्ञों एवं विचारकों ने की। महात्मा गांधी इसके दो बार सभापति हुए।1935 में महात्मा गांधी जी नें एक सभा में नीति बनाई जिसके अनुसार हिंदी एक ऐसी भाषा थी जिसको देवनागरी और फारसी दोनों लिपियों में लिखा जा सकता था I गांधी जी की इस नीति ने सभा में पुरुषोत्तम दास एंव अन्य वरिष्ठ पद धारकों को सख्त नाराज़ कर दिया था I इसके लिए एक योजना बनाई गयी जिसके अनुसार अबोहर में गांधी जी की इस नीति को अस्वीकार करना और हिंदी भाषा को एक ऐसी भाषा के तौर पर निर्धारित करना था जो कि सिर्फ देवनागरी में ही लिखी जा सकती थी I राष्ट्र-भाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार की इन गतिविधियों का सुपरिणाम यह हुआ कि सन् 1947 में देश-विभाजन के समय फाजिल्का तहसील, जिसमें अबोहर भी शामिल था, बड़े-बड़े प्रभावशाली मुसलमान जागीरदारों, काश्तकारों और व्यापारियों की पर्याप्त आबादी होते हुए भी, हिन्दी-भाषी और हिन्दू-सिख बहुल मानी जाकर पाकिस्तान में जाने से बच सकी और उसके साथ लगती छोटी-छोटी मुस्लिम रिसायतें जलालाबाद और ममदोट भी भारतवर्ष के हिस्से में आ गईं।
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