भारत विभाजन से पहले चलते थे – अब बंद क्यों है हिंदी स्कूल ?

हिन्दी दिवस पर विशेष

भारत विभाजन से पूर्व फाजिल्का शहर में हिन्दी की शिक्षा देने के लिए 2 स्कूल चलाए जाते थे। विभाजन के बाद दोनों हिन्दी स्कूल बंद कर दिये गए हैं। जबकि एक स्कूल 1904 में बना आर्य समाज स्कूल आज भी चल रहा है। हिन्दी स्कूल बंद होने से क्षेत्र में हिन्दी भाषा को गहरा धक्का लगा है। बता दें कि विभाजन से पूर्व फाजिल्का में मुस्लिम समुदाय अधिक था जिस कारण फाजिल्का के अन्य स्कूलों में उर्दू भाषा का ज्ञान दिया जाता था।

साधू आश्रम में था हिन्दी स्कूल

Sadhu Ashram Fazilka

स्वामी केशवानंद देशभक्त सामाजिक कार्यकर्ता थे, उन्होंने अनाथ अनपढ़ बच्चों के लिए देश भर में 300 स्कूल बनवाये। इनमें 1904 में फाजिल्का के साधू आश्रम में हिंदुओं के लिए भी एक ही पाठशाला बनाई गई। जहां हिंदी की शिक्षा दी जाती थी। 1933 में उन्होंने अबोहर में दीपक नामक प्रेस लगाई, जहां सिर्फ हिन्दी में ही काम किया जाता था। उन्होंने 100 पुस्तकों का हिन्दी अनुवाद किया। मगर उनकी ओर से बनाया गया स्कूल आज बंद है।

विभाजन से पूर्व यहां भी चलता था स्कूल

भारत विभाजन से पूर्व वान बाजार में श्री राम कीर्तन सभा की ओर से भठेजा जंझ घर में हिन्दी का स्कूल चलाया जाता था। मुस्लिम समुदाया अधिक होने के कारण अन्य स्कूलों में उर्दू का ज्ञान दिया जाता था। हिन्दी स्कूल में मास्टर चिमन लाल मोंगा मूल चंद सेठी शिक्षक रहे हैं, लेकिन विभाजन के बाद यह स्कूल भी बंद हो गया।

सरकार हिन्दी से कर रही है अन्याय

हिन्दी के रिटायर्ड लैक्चरर अशोक मोंगा ने बताया कि पंजाब में हिन्दी का स्तर गिरने का कारण पंजाब सरकार की ओर से हिन्दी को प्रोत्साहन न देना है। उन्होंने बताया कि पहले अंग्रेजी पहली कक्षा से शुरू की गई थी। जबकि हिन्दी तीसरी या चौथी कक्षा से शुरू होती है। उन्होंने कहा कि हिन्दी पहली कक्षा से शुरू हो और अंग्रेजी चौथी कक्षा से शुरू होनी चाहिए। उन्होंने मांग की है कि सरकार को चाहिए कि पंजाबी और हिन्दी भाषा को बराबर का प्रोत्साहन दिया जाए ताकि अन्य राज्यों में नौकरी करते समय किसी को परेशानी न हो। उन्होंने कहा कि हिन्दी भाषा हमारी राष्ट्रीय भाषा है, हर देश की अपनी राष्ट्रीय भाषा है और वहां उसी भाषा में ही हर काम होता है, जिस कारण वह विकासशील देश हैं।

Arya Putri Pathshala Fazilka

भारत विभाजन से पहले चलते थे – अब बंद क्यों है हिंदी स्कूल ?&rdquo पर एक विचार;

  1. ਹਿੰਦੀ ਪੰਜਾਬ ਵਿੱਚ ਪੜ੍ਹਾਈ ਨਹੀਂ ਜਾਂਦੀ ਅਤੇ ਕੋਈ ਪੰਜਾਬੀ ਬੰਦਾ ਪੰਜਾਬ ਤੋਂ ਬਾਹਰ ਜਾ ਕੇ ਹਿੰਦੀ ਪੜ੍ਹਨ ਲਿਖਣ ਦੀ ਨੌਬਤ ਆਉਂਦੀ ਐ ਤਾਂ ਓਦੋਂ ਪਤਾ ਲੱਗਦਾ।

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