नई खोज – 150 साल पुराने मील पत्थर ने इतिहास में जोड़ी एक और कड़ी !!!

विशाल भारत की सबसे लंबी चौड़ी सडक़ों में शुमार रही एक सडक़ फाजिल्का तक पहुंचती थी। यह सडक़ नरेला से शुरू होकर वाया सिरसा से होते हुए फाजिल्का के निकट सतलुज दरिया तक पहुंचती थी। बरसों पुरानी इस सडक़ का एक मील पत्थर गांव मौजम के एक घर में मिला है। इसका पता फाजिल्का के इतिहासकार लछमण दोस्त ने लगाया है। उन्होंने बताया कि फाजिल्का और सिरसा के निकट पक्की सडक़ें एक या दो मील तक ही लंबी थी। जो कच्ची सडक़ हजारों मील लंबी थी वो फाजिल्का से गुजरती थी। इसके बाद कच्ची सडक़ जिला औकाड़ा (अब पाकिस्तान में) तक जाती थी।

अंग्रेजी फारसी पर लिखा है सिरसा

लछमण दोस्त ने बताया कि यह मील पत्थर गांव मौजम के रहने वाले राम सिंह पुत्र करतार सिंह के घर में मिला है। घर की बुजुर्ग महिला गहलो बाई ने बताया कि सतलुज दरिया में बाढ़ के कारण उनके खेत के निकट मिट्टी का टिब्बा सा बन गया। वहां से धीरे धीरे मिट्टी हटाई जाती रही तो नीचे से मील पत्थर निकला। जो उन्होंने एक यादगार के तौर पर अपने घर में रख लिया। इस मील पत्थर पर अंग्रेजी फारसी में सिरसा 90 लिखा हुआ है।

Gehlo Bai

औकाड़ा तक जाती थी सडक़

यह कच्ची सडक़ नरेला (अब उत्तर दिल्ली का जिला) से शुरू होकर जिला हिसार पहुंचती। सडक़ हिसार के बीचोबीच से गुजरकर जिला सिरसा और डबवाली तहसील से होती हुई फाजिल्का पहुंचती थी। फाजिल्का से यह सडक़ मौजम गांव तक जाती थी। जहां से सतलुज दरिया पार करने के लिए किश्ती में जाना पड़ता था। दरिया पार करने के बाद सडक़ औकाड़ा शहर तक जाती थी, जो सिंधपंजाबदिल्ली रेल लाइन पर मिंटगुमरी जिले में मौजूद है।

Lachhman Dost Historian

पाविन्दा व्यापारी करते थे प्रयोग

उन्होंने बताया कि इस सडक़ का प्रयोग अधिकांश पाविन्दा नामक व्यापारी करते थे तो काबूल कंधार से चलकर दिल्ली में व्यापार के बाद उत्तर पच्छित इलाकों में पहुंचते थे। पाविन्दा व्यापारी सर्दी के दिनों में जिला सिरसा से होकर फाजिल्का पहुंचते थे और यहां से आगे अपना कारोबार के लिए चले जाते थे। व्यापारी अपने ऊटों पर व्यापारिक वस्तुओं को भरकर लाते थे। ऊटों की संख्यां दो-चार नहीं, सैंकड़ों होती। जब वह चलते तो ऊंटों की एक बड़ी कतार होती थी।

MileStone

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