इतना महान रहा है मेरा शहर !!!!

पंजाब और दिल्ली के बीच व्यापार का रास्ता रहा हैबेशक पैट्रिक एलैगजंडर वन्स ऐगन्यू ने 1844 में यहां बंगला बनवाया, लेकिन इसका अर्थ कतई नही लिया जा सकता कि यह क्षेत्र पहले नही थाक्षेत्र थालोग छोटेछोटे गांवों में रहते थेइनके बीच कच्चा रास्ता थाजहां से राजामहाराजा गुजरते थेलाहौरपाकपटनऔकाड़ा से दिल्लीवहां से अफगानिस्तान तक व्यापार होता थायह भी पता चल गया कि औकाड़ा दिल्ली सडक़ फाजिल्का में से होकर जाती थीइनमें से ही एक सडक़ फाजिल्का से अबोहरमलोटसिरसा जाती थीइन सडक़ों पर पुराने सिक्के मिल चुके हैं।

    सरकारी रिकॉर्ड मुताबिक फाजिल्का-अबोहर के आसपास के क्षेत्र से सांढ़ और घुड़सवार सिक्के मिल चुके हैं जो किंग ऑफ ओहीयूड अबाऊट ए.डी. 1000 के थे…

दिल्ली के अलाऊदीन मुहम्मद के सिक्के भी मिले…दिल्ली के सुल्तान मुहम्मद बिन सोमी शाम्स उद्दीन इल्तुतमिस (1211-1236)…बलबन (1266-1286)…लालुद्दीन फिरोज…अल्लाऊदीन मुहम्मद…मुहम्मद बिन तुगलक (1325-1351)…फिरोजशाह तुगलक (1351-1388) के जमाने के सिक्के मिल चुके हैं…जो रिकॉर्ड में दर्ज हैं।

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