अवैध मुहब्बत करने वालों को पनाह नहीं देता अल्हा…सुनते ही जल्लाद ने खींच दी फांसी की रस्सी

फाजिल्का के करीब चार किलोमीटर दूर है गांव गंजूआणा हस्ता। जहां भारत विभाजन से पहले यहां बोदला जाति के समुदाय का बोलबाला था। इनमें एक जमींदार की दास्तान बड़ी अनोखी है। उस जमींदार में खासियत थी कि वह अवैध प्रेम से नफरत करता था। वह जमींदार था गुलाम नबी बोदला। जो घोड़े रखने का काफी शौकीन था, मगर शराब से उसे नफरत थी। सुबह घोड़े पर चढक़र घूमना और दिनभर खेत में गुजार देना उनकी दिनचर्या में शामिल था। गांव मेें उनकी एक बड़ी सुंदर हवेली थी जिसकी धूम आसपास के गांवों के अलावा अन्य शहरों में भी थी। एक बेटी तथा एक बेटे का पिता गुलाम नबी का सारा दिन हवेली के बाहर गुजरता था। हां, सुबह एक घंटा वह हवेली में जरूर रहता और लोगों की मुश्किलें सुनकर उनका समाधान करता। रोजाना कई लोग उसके पास फरियाद लेकर आते। जिनका निपटारा वह मौके पर ही कर देता। इस कारण उसकी चर्चा दूर-दूर के गांवों तक फैली हुई थी। लोग उसे सम्मान सहित अदब करते थे।उस ने गांव में सूंदर मसीत भी बनवाई हुई थी –

Guru duara vill. Ganju Hasta -Fazilka

       एक रात जब गुलाम नबी हवेली में देर से लौटे तो उसके नौकर ने घोड़ा पकड़ा और तबेले में बांध दिया, लेकिन नौकर के चेहरे पर रोजाना की तरह मुस्कराहट नहीं थी। उसकी नजरें देखकर गुलाम नबी समझ गया कि कोई कोई बात जरूर है। पूछने पर भी नौकर ने नहीं बताया। बेटी के चेहरे पर मुस्कराहट और ही बेटे के चेहरे पर शरारत। पत्नी अलग कमरे में शांत बैठी थी। गुलाम नबी ने सबका चेहरा पढ़ा, लेकिन हकीकत नही पढ़ पाया। बच्चों की मां की आंखों में भरा धोखा गुलाम नबी नही समझ पाए। आखिर बेटे ने मुंह खोला और बोल दिया कि वह अब मां के साथ नही रहेगा। उसे मां से सख्त नफरत हो गई। मगर ज्यादा बताने से साफ मना कर गया। समय बीतता गया। बेटा युवा अवस्था में पहुंच चुका था। रोजाना मां से नफरत भरी आंखों के चलते गुलाम नबी ने अपने बेटे और बेटी को अलग जगह दे दी, लेकिन वह अपने बेटे की जुबान का ताला नही खोल पाया। गांव में तरहतरह के किस्से फैल चुके थे। एक दिन इस किस्से की हवा गुलाम नबी के कानों तक पहुंची, लेकिन उसे पत्नी पर पूरा भरोसा था। उसने पत्नी से पूछा, लेकिन पत्नी बताने वाली नहीं थी। जो लोग उसे अदब से सलाम करते थे, वह उससे दूर रहने लगे। लोग भी फरियाद लेकर आना बंद कर गए। जमींदार को अपमान महसूस होने लगा। मगर वह हकीकत को जाने कैसे ? इस गम को भूलाने के लिए उसने शराब का सहारा लिया। बात दूरदूर तक पहुंच चुकी थी। गांव के नंबरदार विजय हांडा बताते हैं कि जमींदार शराब का आदि बन गया। जमींदार रोजाना घोड़े पर सवार होकर फाजिल्का आता और पीपल वाला चौंक के ठेके से शराब पीने लग जाता। एक रात हवेली में एक अजनबी को देखकर उसका शक यकीन में बदल गया। आंखों में गुस्से की लाली और चेहरे पर हकीकत को पत्नी तुरंत पहचान गई। मन में चोर था। इसलिए पत्नी ने जुबान नहीं खोली। अजनबी तो भाग गया, लेकिन शक से फैली नफरत की आंधी के कारण गुलाम नबी अपने गुस्से पर काबू नही पा सका। उसकी आँखों में खून उतर आया। गुलाम नबी हवेली के अंदर गया और तेजधार हथियार उठाकर पत्नी की तरफ दौड़ा। पलक झपकते ही उसने अन्य व्यक्ति से अवैध संबन्ध बनाने वाली पत्नी पर हथियार से वार करके हत्या कर दी। हत्या के बाद वह बेखौफ खड़ा रहा। थोड़ी देर सोचने के बाद उसने लाश को उठाया और तबेले में जाकर घोड़े पर रख दी। नौकर हादसा देखकर भाग गया। जमींदार घोड़े पर बैठा और लाश सहित चल पड़ा। घोड़ा आराम से चल रहा था। घोड़े पर रखी लाश से निकलती खून की बूंदें हॉर्स शू लेक तक गिरती गई, लेकिन जमींदार पर इसका कोई असर नहीं था। उसकी तो एक मात्र सोच थी कि जो अवैध सम्बन्ध बनाता है। उसे स्वर्ग में कभी जगह नही मिलती। भगवान उसे कभी माफ नही करता तो फिर इंसान होकर उसे माफ कैसे कर सकता है ? जो लोग उसे झुककर सलाम करते थे, वह लोग उसकी पत्नी के इश्क की चर्चा का मजा ले रहे थे। वह गुलाम नबी की सहनशक्ति से बाहर था। यही कारण था कि उसने पत्नी की हत्या कर दी। जिसका उसे जरा भी अफसोस नही था।

Haveli Gulam Nabi

सूर्य उदय हो चुका था। किसी तरह ब्रिटिश पुलिस को हत्या की खबर मिल गई। पुलिस हत्या की गुत्थी सुलझाने के लिए गांव में पहुंच गई। जहां से उन्हें हत्या का सुराग मिला और उन्होंने जमींदार गुलाम नबी को गिरफ्तार कर जेल की सलाखों के पीछे धकेल दिया। इसके बावजूद जमींदार के माथे पर कभी अफसोस नही आया। जेल में ही उसे फांसी की सजा की सूचना मिली। समय की घड़ी चलती गई। फांसी की तैयारियां शुरू हो गई। चेहरे पर काला कपड़ा लपेटकर गुलाम नबी को फांसी के रस्से के नजदीक लाया गया और उसकी अंतिम इच्छा पूछी गई, तब भी उसकी जुबान से एक शब्द निकला। वह शब्द था – अवैध संबंध बनाना पाप है। अल्हा उसे कभी पनाह नहीं देता जो स्त्री पति के होते हुए अन्य व्यक्ति से संबंध बनाती है। रस्सी को उसके गले में डाल दिया गया। पलक झपकते ही गुलाम नबी की लाश रस्सी से लटकती हुई नजर आई। बरसों तक गुलाम नबी के इस किस्से की कहानी माताएं अपनी बेटियों को सुनाती रही। इस कहानी के बाद कभी गांव में इश्क की चर्चा तक नही हुई। भारत विभाजन हुआ तो गुलाम नबी का बेटा-बेटी पाकिस्तान चले गए। पीछे से खाली रह गई एक बड़ी हवेली और गुलाम नबी की दर्द-भरी दास्तान।

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