क्यों खाली हो गया था मेरा रंगला बंगला फाजिल्का ?

यह न तो मंदिर है और न ही मस्जिद, गुरूद्वारा या चर्च, इसके बावजूद यहां आने वाला हर व्यक्ति श्रद्धा से शीश झुकाता है। यानि देश प्रेम और धार्मिक आस्था का प्रतीक। हां, हम बात कर रहे हैं फाजिल्का से सात किलोमीटर दूर पश्चिम की ओर भारत-पाक सरहद के निकट आसफवाला शहीदी स्मारक की, जहां जहां 4 जाट बटालियन के 82 शहीदों की चिता स्थल बनाया गया है। इस स्मारक में ही फाजिल्का सेक्टर में शहीद 15 राजपूत, 3 आसाम बटालियन और 18 अश्वाराहेही सैनिक बटालियन के शहीद सैनिकों के स्मृति स्तम्भ भी सम्मिलित हैं। स्मारक देश ही एक मात्र ऐसी स्मारक है, जहां विभिन्न राज्यों के 206 शहीद जवानों की अस्थियों का समावेश किया है। यहां 1971 के शहीद जवानों की 90 फीट लंबी और 18 फीट चौड़ी चिता बनाकर संयुक्त दाह संस्कार किया गया है। इन शहीदों की बदौलत आज हम हैं और हमारा फाजिल्का है।

फाजिल्का सेक्टर में 1971 का युद्ध सबसे बड़ा युद्ध था। बात 3 दिसंबर 1971 की है। इस दिन फाजिल्का खाली हो गया था पाक रेंजरों ने गांव बेरीवाला के पुल पर कब्जा कर लिया। दुश्मन जब फाजिल्का की तरफ बढ़ा तो 4 जाट बटालियन के जवानों ने दुश्मन पर हमला करके कई इलाके छीन लिए, लेकिन बेरीवाला पुल काबू में नहीं आ सका। पाकिस्तान की नफरी बढ़ती गई और साबूना बांध पर पहुंच गया। इस दौरान पाक की ओर से 2500 जवान, 28 टैंक और भारी तोपों से लैस एक पैद बिग्रेड लगा दी गई। 4 दिसंबर की रात तक दुश्मन गांव पक्का तक पहुंच गया। मगर तीन आसाम बटालियन ने उन्हें रोक लिया और साबूना बांध तक जवान पहुंच गया। उधर सेना की 15 राजपूत बटालियन ने फाजिल्का का बचाव किया।

गज्जी के समीप 15 राजपूत और 4 जाट बटालियन के जवानों ने गुरमुख खेड़ा गांव की तरफ से हमला किया तो बेरीवाला पुल से फाजिल्का की तरफ जाने वाला रास्ता बंद हो गया। बेरीवाला पुल पर भारी युद्ध हुआ। आखिर 17 दिसंबर की रात आठ बजे युद्ध समाप्ति की घोषणा कर दी गई। 18 दिसंबर सुबह सात बजे से लेकर सांय तीन बजे तक शहीदों के शवों को आसफवाला में एकत्रित करके संयुक्त दाह संस्कार किया गया। बाद में श्री राम रक्खा ठकराल ने आधा एकड़ भूमि दान दी और शहीदी स्मारक बनाई गई। पहले यहां 4 जाट बटालियन के शहीद जवानों का स्मारक था, लेकिन 1991 में 67 इन्फेन्ट्री बिग्रेड के बाकी आठ यूनियटों के स्मारक बनाए गए। यहां वार मेमोरियल भी बनाया गया है। जहां पाक रेंजरों से छीने गए हथियार, 6 पाउंडर गन, गिलगिट जीप, शेरमन टैंक के अलावा शहीद जवानों की तस्वीरों का संग्रहाल्य बनाया गया है। यहां हर साल विजय दिवस मनाया जाता है। जहां भारतीय सैनिक, प्रशासन के अधिकारी, स्थानिय लोगों के अलावा दूरदराज से आने वाले श्रद्धालु शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। (Lachhman Dost – 99140-63937)

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