
कश्मीर मुद्दे को लेकर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने युद्ध तक की धमकी दी थी…शायद वह सर्जिकल स्ट्राइक को भूल गए हैं…अगर चंद रोज पहले की सर्जिकल स्ट्राइक भूल गए तो फिर 1965 के युद्ध दौरान पाकिस्तान को नाको–चने चबाने वाले जवान हवालदार जस्सा सिंह तो उन्हें याद भी नहीं होगा…इसलिए उन्हें हवालदार जस्सा सिंह की दास्तान बताना जरूरी है।
भले ही उनका जिक्र बहुत कम हुआ है…मगर युद्ध में उन्होंने जो वीरता दिखाई, उस कारण ही उन्हें युद्ध गैलेंट हीरो कहा जाता है… भारतीय सेना की 14 पंजाब नाभा अकाल के लंबे कदम के इस वीर जवान हवलदार जस्सा सिंह को बहादुरी के बदले वीर चक्र सम्मान से नवाजा गया…उनके यूनिट को फाजिल्का सैक्टर के गांव चाननवाला के निकट तैनात किया गया…इस तरफ से ही दुश्मनों ने भारत पर हमला किया…सुलेमानकी बॉर्डर दुश्मनों के निशाने पर था…दुश्मन साबूना ड्रेन पार न कर सकें…इस उद्देश्य से इस यूनिट को ड्रेन के दूसरी ओर तैनात किया गया…ड्रेन और बॉर्डर के बीच सिर्फ सात किलोमीटर की दूरी थी…दुश्मन धीरे-धीरे भारतीय सीमा में घुसने लगा तो लैफ्टीनेट कर्नल सी. एस. भुल्लर ने एक योजना बनाई…उस योजना मुताबिक दो कंपनियों के साथ सुरक्षा तैनात की गई…योजना अनुसार मध्य से निकलती सडक़ को दो हिस्सों ए और बी में बांटा गया…हवलदार जस्सा सिंह को बी कंपनी में तैनात किया गया…दुश्मन ने अपनी योजना मुताबिक सात सितंबर की रात हमला किया…उस जबरदस्त हमले में एक जवान शहीद हो गया…मगर सेना के वीर जवानों ने दुश्मन को अपनी धरती पर कदम नहीं रखने दिया…पाक ने हमले की दिशा बदलकर 9 सितंबर को दोबारा हमला किया…पाक ने बी कंपनी पर सुनयोजित हमला किया…हमले के जवाब में हवलदार जस्सा सिंह ने दुश्मन पर गोलियों की बौछार कर दी…जस्सा सिंह की गोलियों की आवाज बंद हुई तो दुश्मन आगे बढऩे लगा…जस्सा सिंह भी आगे बढ़ा और एक बंकर में पहुंच गया…हवलदार जस्सा सिंह को दुश्मनों को मार गिराने का इतना हौसला था कि उसे पता भी नहीं चला कि वह दुश्मन की धरती पर बने पाकिस्तानी बंकर में पहुंच चुका है…यह पता चलते ही दुश्मन जस्सा सिंह पर टूट पड़े…दुश्मन ने धड़ाधड़ गोलीबारी की…जवाब में जस्सा सिंह ने गोलियां दागी, लेकिन बाद में उसकी बंदूक की गोलियां खत्म हो गई…फिर भी जस्सा सिंह ने हौसला नहीं छोड़ा और दोनाली के बट से दुश्मन की भूमि पर दुश्मन चौकी रक्षक को ढ़ेर कर दिया…दुश्मनों को इस बात का पता चला तो वे जस्सा सिंह की तरफ बढ़े…दुश्मनों का बहादुरी से मुकाबला करते हुए जस्सा सिंह के शरीर के तीन हिस्से चोट से ग्रसित हो गए…शरीर से खून की बूंदे गिरती देख जस्सा सिंह घायल शेर की तरह दुश्मनों पर टूट पड़ा…दोनाली के बट और गोलियों का जबरदस्त मुकाबला बन गया…घायल शेर के आगे दुश्मन टिक नहीं पाया…जस्सा सिंह ने तीन दुश्मनों को मौत की नींद सुला दिया, खून से रंगे हाथ आगे बढ़ते गए…दोनाली के बट से हमला जारी रहा जो दुश्मन जस्सा सिंह की तरफ बढ़ा, वह उसकी दोनाली के बट का शिकार बन गया…दो दुश्मनों को ढ़ेर करने के बाद दोनाली जस्सा सिंह के खून से रंग गई…जस्सा सिंह की आंखों में से दुश्मनी का खून टपकता देख दुश्मन के आगे बढऩे की हिम्मत टूट गई…जस्सा सिंह आगे बढ़ा और दुश्मन के हथियारों वाले बक्से तक पहुंच गया…जस्सा सिंह ने उस बकसे को इस तरह बेकार कर डाला कि वे कभी भारत के खिलाफ प्रयोग ही न हो पाएं…इतने में भारतीय सेना के अन्य जवान भी जस्सा सिंह के साथ आगे बढ़ते हुये मौके पर पहुंच गए…वहां दुश्मनों के कुछ हथियार बेकार होने से बचे पड़े थे…जवानों ने उन्हें कब्जे में ले लिया…कुछ दिन बाद युद्ध समाप्ति की घोषणा हो गई…इस गैलेंट हीरो को बहादुरी के लिये वीर चक्र सम्मान से नवाजा गया।
बताना जरूरी है कि भारत पाक के बीच छह सितम्बर को यह युद्ध हुआ था…पाक ने गोलाबारी की और साबूना बांध पर हमला कर दिया…तब 14 पंजाब रेजीमेंट के जवानों ने दुश्मन को करारा जवाब दिया…जब दुश्मन गांव चाननवाला के रेलवे लाइन के साथ-साथ फाजिल्का की तरफ बढ़ा तो फिरोजपुर से आई 3/9 गोरखा राइफल की दो कंपनियों के जवानों ने दुश्मन को रोक लिया…दुश्मन ने उन पर तीन हमले किए, लेकिन सेना डटी रही और दुश्मन आगे नहीं बढ़ पाया…आखिर 23 सितंबर को युद्ध समाप्ति की घोषणा हो गई।











































































































