नशा मुक्त गांव

सियासत और प्रशासन चाहे तो चार सप्ताह में बन सकता है नशा मुक्त पंजाब

नशे के नाम पर पंजाब काफी बदनाम हो चुका है। पंजाब में नशे को खत्म करने के लिए सरकार हर संभव प्रयास कर रही है। जगह जगह सैमीनार लगाए जा रहे हैं। अब तो यह अभियान स्कूलों तक पहुंच गया है, बच्चों को तो यहां तक कहा गया है कि अगर उनके आसपास कोई नशा बेचता है तो इसकी जानकारी स्कूल टीचर को दें। स्कूल टीचर वह सूचना पुलिस तक पहुंचाएंगे। वहीं पुलिस इन दिनों नशा तस्करों पर धड़ाधड़ पर्चे काट रही है। उन्हें काबू कर रही है। मगर यह नहीं सोचा जा रहा कि इसमें असली दोषी कौन है. . . ? सियासत और प्रशासन . . . दो ही तो नाम सामने आते हैं. . . अगर यह दोनों चाहें तो नशा खत्म करना वाक्य ही मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेन्द्र सिंह का ब्यान . . . चार सप्ताह में नशा खत्म कर दूंगा . . . सच्च साबित हो सकता है . . .  ऐसा ही एक वाक्य गांव मुहम्मद पीरा (भारत पाकिस्तान की जीरो लाइन के निकट बसा गांव) में भारत विभाजन से पहले का है . . . गांव के जैलदार अकबर खान की बदौलत गांव क्राइम मुक्त था . . .गांव में क्राइम जीरो . . . गांव के बुजुर्ग नैण सिंह बताते हैं कि गांव मेें अगर कोई युवक डिजाईन वाले बाल संवार कर चलता तो जैलदार अकबर खान के कहने पर गांव का एक खोजा उसे पांच जूते मारता था . . . जिस कारण हर व्यक्ति सिर पर कोई कपड़ा या पगड़ी बांधकर चलता . . . महिलाएं के सिर पर भी दुपट्टा जरूर होता . . . अगर यहां तक होता तो फिर उस गांव में पुलिस का क्या काम . . . वास्तव में ही गांव क्राइम मुक्त था।

        लंबे कद व मोटी आंखों वाला अकबर खान गांव पक्का चिश्ती में कचहरी भी लगाता था. . . उसका दोस्त था पंजा सिंह . . . एक गांव निकट के गांव शरींह वाला (शायद ये गांव पाकिस्तान में है) का चाकर सिंह शराब निकालने के आरोप में पकड़ा गया . . मुहम्मद पुलिस उसे पकड़ लाई . . . पंजा सिंह ने अकबर खान को इस बारे में जानकारी दी और छुड़ाने की बात कही . . . मगर अकबर खान नहीं माना . . . हालांकि उसके संदेश पर ही चाकर सिंह को पुलिस छोड़ सकती थी, लेकिन अकबर खान ने कहा कि तेरी यारी छोड़ सकता हूं पंजा सिंह . . . अपराधी का चेहरा न खुद देखूंगा और न ही अपनी जैल के किसी व्यक्ति को देखने दूंगा . . . जा . . आज से तुम मेेरे यार नहीं . . .उनकी दोस्ती टूट गई . . . मगर अकबर खान ने उन गांवों में कभी नशे वाले की मदद नहीं की  . . . मेरे मौहल्ले के ही हाकम सिंह (जो अकबर खान की खेती करते थे) बताते हैं कि उनकी कहानी विभाजन के बाद भी बरसों तक बच्चों को सुनाई जाती रही . . . हाकम सिंह तो आज भी बताते हैं कि अगर सियासत और प्रशासन चाहे तो श्री गुटका साहिब भी हाथ में पकडऩे की जरूरत नहीं . . . नशा चार हफ्तों में खत्म हो सकता है  . . .

         अगर आप इससे सहमत हैं तो इस बात को अन्य लोगों तक पहुंचाए ताकि किसी बहन का भाई . . . पत्नी का सुहाग . . . बच्चों के सिर से पिता का साया, भाई से भाई व दोस्त से कोई दोस्त सदा के बिछुड़ न सके।

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