आबरू बचाने के लिए मार दी परिवार की 14 महिलाएं

Indo-Pak Partition-8

Pehalwan Chand Sachu

भाईयों की तरह रहते थेहिन्दु, मुस्लिम और सिखमगर अचानक जब देश के विभाजन की घोषणा हुई तो एक तरफ हिन्दु सिख और दूसरी तरफ मुसलमानदुश्मन बन गए एक दूसरे केएक दूसरे को मारने काटने लगेमुकाबले भी डटकर हुएमुकाबले क्यादंगे थेधनजमीनजायदादचाहे सबकुछ लुट जाएकोई खास चिंता नहीं थीचिंता थीमहिलाओं की आबरू बचाने कीउन दरिंदों सेजिन्हें किसी की मां, बहन और बेटी से कोई मतलब नहीं थाधन लूटनामार काटनामहिलाओं की आबरू लूटाबसविभाजन का वो यही फायदा उठाना चाहते थेमगर कईयों ने या तो महिलाओं को दरिंदों से बचाने के लिए मार दियाया फिरमहिलाओं ने कुंएयाहैड में छलांग मारकर आत्महत्या कर लीक्या करती बेचारीवो सोचती थीइज्जत है तो सबकुछ हैइज्जत ही नहीं तोजीने का क्या फायदाबस यही हुआ था गैहरा राम के साथ भीजिनकी आज हम बात कर रहे हैं।

 देश के विभाजन से पहले जिला मिन्टगुमरी की तहसील ओकाड़ा के गांव गैंबर में रहते थे गैहरा रामदेश का विभाजन हुआ तो दुश्मनों का काफिला उन पर टूट पड़ावह लुटेरे थेहैवान भीेधन लूटने के अलावा उनकी मंशा महिलाओं की आबरू से खिलवाड़ करने की थीमगर गैहरा राम को यह सहन नहीं थादरिंदे उनके परिवार पर टूट पड़ेइससे पहले ही उसने अपने परिवार की 14 युवतियों महिलाओं की हत्या कर दीफिर वह टूट पड़ेदरिंदों के काफिले परडटकर मुकाबला कियातीन दरिंदों को मौत के घाट उतार दिया।

1st Ashok Verma 2nd Sumesh Verma 3rd. Krishan Taneja 4th Pehalwan Chand Sachu

   परिवार में कुल 20 सदस्य रह गएवह सभी वहां से चल पड़ेएक काफिले के रूप मेंसबकुछ वहीं छोडक़रतेजी से दौड़ेपरिवार में दो तीन दूधमूंही बच्चियां भी थीयाद आयाएक मुस्लिम दोस्तजिसे तीनों को सौंप दियावायदा किया कि वह उन्हें कुछ माह बाद ले जाएंगेजब हालात सुधर जाएंगे तोबसफिर चल पड़े भारत की ओरगांव के निकट ही रेलवे स्टेशन थाट्रेन पर चढ़ गएट्रेन जब गांव रायविंड पहुंची तो मुस्लिमों के एक काफिले ने ट्रेन घेर लीबोलेट्रेन का इंजन हमारा हैट्रेन डिब्बे तुम्हारे हैंविवाद छिड़ गयासाथ आर्मी थीविवाद तो निपट गयामगरभारत से इंजन जाने के बादसमय लगना थाआर्मी ने संदेश भेजा हुआ थाऔरभारतीय इंजन की इंतजार थीइंजन आया औरफिर वहां से चलेभारत की तरफट्रेन परदूसरे दिन शाम छह बजे पहुंचे फिरोजपुर।

गैहरा राम के पोता पहलवान चंद पुत्र कर्म चंद (गांधी नगर फाजिल्का) बताते हैं कि उस समय उसकी आयु करीब 14 साल थीऔर उन्हें याद हैवो दिल दहलाने वाली घटनाजब रायविंड से ट्रेन पर कासू बेगू पहुंचे तो पता चला कि इससे पहले पाकिस्तान से जो दो ट्रेन आई थीउनमें सिर्फ शव थेहिन्दु और सिखों केवह ट्रेन से उतरे और शरणार्थी कैंप में चले गएयहां भी मौत मुंह फैलाए हुए खड़ी थीअगर पता होता तो उन्हें मरने से कोई रोक नहीं सकता था ारणकारण यह था कि विभाजन दौरान मुसलमानों ने वहां के कुंओं पर जल स्त्रोतों में जहर मिला दिया थाताकिहिन्दु और सिख पानी पीकर मर जाएंमगर किसी को पता चल गया थाइसलिए वह प्यासे रहे

 वहां घोषणा हुई…जो मिन्टगुमरी से आए हैं वो परिवार सहित अंबाला चले जाएं…उन्हें वहां जगह मिलेगी…अंबाला पहुंचे…दो दिन इंतजार किया…फिर सोनीपत में जगह अलॉट होने की बात कही गई…वहां से भी खाली हाथ लौटना पड़ा…फिर फिरोजपुर लौट आए…वहां 6 माह काटे…वहां से फिर चले रंगले बंगले फाजिल्का की तरफ…जहां वह 12 साल तक किराए के मकान में रहे…बाद में बजाजी बाजार में कपड़े का कारोबार शुरू किया…आज परिवार के साथ खुशी से जीवन यापन कर रहे हैं।(Writer- Krishan Taneja 92566-12340)

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