फुटेला परिवार की दास्तां
Indo-Pak Partition-9

कोई व्यक्ति अपनी मां, पत्नी व बच्चों की अपने हाथ से हत्या कर दे…सुनते ही आत्मा तक कांप उठती है…मगर जब सवाल धर्म का हो…आत्म सम्मान को हो…तो यह सबकुछ संभव है…अगर बात हिन्दु परिवार की हो तो वह धर्म के लिए परिवार नहीं देखता…ऐसा हुआ है…और…ऐसी घटना को अंजाम दिया है…फुटेला परिवार ने…बात दिनों या महीनों की नहीं…बात दशकों की है…वो भी उस समय…जब देश के दो टुकड़े हुए थे…यानि…जब देश का विभाजन हुआ था…उस समय Hans Raj phutela ने अपनी ही माता दानी देवी को तलवार से शहीद कर दिया…Hans Raj phutela की पत्नी की कुर्बानी भी देखों…रोना नहीं…सम्मान होता है…इस बात से…जब वह जमीन पर लेट गई और पति से बोली…मेरे टुकड़े कर दो…Hans Raj phutela ने उसके चार टुकड़े कर दिए…फिर सात भाईयों की बहन सत्यदेवी भी ऐसी कुर्बानी देने से नहीं चूंकी…उसने भी इस तरह शहादत का जाम पी लिया…फिर उसने अपनी भाभी सत्यादेवी को शहीद किया गया…6 माह का बच्चा भी था…जब उस पर चमकती तलवार आई…तो उसकी आंखों ने देखा…शायद खेल हो…उसकी मुस्कराहट ने तलवार को रोक दिया…मन डोल गया…वह उसे गोद में उठाकर चल दिए…फैसला लिया…इस नन्हें बच्चे को जीने का अधिकार देंगे..

.मगर जब सोचा…मुकाबला मुसलमानो से है…अगर बच्चा उनके हाथ लग गया…तो…सारी जिंदगी उनकी गुलामी करेगा…तब फिर उठी तलवार…उसे भी धरती मां पर न्यौछावर कर दिया। यह दर्दनाक कहानी है फुटेला परिवार की…जिसके बारे में आज हम बात कर रहे हैं…यह जुबानी दास्तां कृष्ण तनेजा को बताई है…फाजिल्का के गांधी नगर निवासी सेवानिवृत अध्यापक प्रेम कुमार फुटेला ने…वह बताते हैं यह घटना पाकिस्तान के जिला मिन्टगुमरी, तहसील पाकपटन के गांव बशीर पुर की है…उन्हें यह दुखदायी घटना उन्हें उनके पिता हंस राज फुटेला ने बताई थी…उस समय उनका आढ़त व करियाणे का बड़ा कारोबार था…उस समय राम चंद फुटेला घर के मुखी थे…किसी समय हंस राज फुटेला, मुलख राज फुटेला, रोशन लाल फुटेला व बाबू राम फुटेला की काफी धूम थी…

प्रेम फुटेला बताते हैं कि उनके पूर्वजों ने उन दिनों तहसील पाकपटन प्रचारक माननीय श्री विश्वनाथ की प्रेरणा से अपने परिवार के साथ साथ अन्य हिन्दु परिवारों को भी बचाने का निर्णय लिया…जो मुसलमान हिन्दुओं की बहु बेटियों को उठाकर ले जा रहे थे…उनका डटकर मुकाबला किया और कई हिन्दु परिवारों को बचाकर भारत पहुंचाया…वह बताते हंै उस समय मंडी बशीर पुर को मुस्लिमों ने चारों तरफ से घेर लिया…बोले…दो दिन में या तो धर्म बदल कर लो…या फिर आपकी हत्या होगी और महिलाएं उठा ली जाएंगी…खुद की हत्या तो मंजूर थी…मगर कोई महिलाओं की तरफ बुरी नजर से देखे…उन्हें मंजूर नहीं था…धर्म परिवर्तन…कभी नहीं…इसलिए घर की महिलाओं और बच्चे को धर्म पर कुर्बान कर दिया…यह कुर्बानी देने वाला परिवार फाजिल्का की गांधी नगर की सीता राम मंदिर गली में सपरिवार कुशलता से रहते हैं। Writer- Krishan Taneja 92566-12340
