गरीब को दे दिया गर्म कोट – खुद कांपते हुए घर लौटा यह शख्स

Perival Haveli

एक दयालु इंसान…जब सुबह सैर को निकलते थे तो उनकी जेब सिक्कों (पैसे) से भरी होती थी…उन्हें रास्ते में जो निर्धन व्यक्ति मिलता, उसके हाथ में वह सिक्के रख देते…बात भारत विभाजन से पहले की है, जब वह सर्दी के दिनों में सैर को जाते थे…एक दिन अधिक सर्दी का मौसम था…एक गरीब ठंड में कांप रहा था…अचानक उनकी नजर उस पर पड़ी तो उन्होंने अपना गर्म कोट उस गरीब को दे दिया और खुद ठंड में कांपते हुए घर पहुंचे…

Ladies Hospital Fazilka

यह शख्स सेठ मदन गोपाल पैड़ीवाल थे…जिस परिवार ने फाजिल्का को घंटा घर दिया…लेडीज अस्पताल दिया…इसके अलावा फाजिल्का, बठिंडा, सूरतगढ़ सहित कई अन्य शहरों में काफी कुछ दिया है। उनका जन्म 1874 में हुआ थाफाजिल्का के निकट सतलुज दरिया होने के कारण इलाका बाढ़ के प्रकोप में आ जाता था। अन्यों के अलावा यह परिवार ही था जो बाढ़ पीडि़तों की हर संभव सहायता करता था। आर्थिक तौर पर संपन्न परिवार और परोपकारी होने के कारण ही ब्रिटिश साम्राज्य की ओर से सेठ मदन गोपाल पेड़ीवाल को राय साहेब का खिताब दिया गया। बताते हैं कि जब गंग केनाल का निर्माण हो रहा था तो उसे देखने के लिए अक्सर ही महाराजा गंगा सिंह फाजिल्का तहसील में आया करते थे। जब वह फाजिल्का आते तो वह यहां अपने एक मात्र दोस्त राय साहेब मदन गोपाल पेड़ीवाल के पास ही ठहरते थे।

Maharaja Ganga Singh

वह 1903 में नगर कौंसिल के सदस्य चुने गए और इसी साल सीनीयर उपप्रधान रहे। परोपकारी होने के कारण उन्हें ब्रिटिश सरकार ने राय साहेब का खिताब दिया और बहुत से सर्टिफिकेट भी दिए। वह श्री सनातन धर्म स्कूल के संस्थापक और व्यवस्थापकों में एक रहे। इसके लिए उन्होंने एक विशाल मैदान बनाकर भी दिया। हिन्दू सभा फाजिल्का के प्रधान और गोशाला के उपप्रधान रहे सेठ मदन गोपाल 20 साल तक ऑनरेरी मजिस्टेट व 34 साल तक पार्षद रहे। उनके चार पुत्र सूरज मल, चांदनमल, गोरी शंकर और जस राज थे। इनमें सूरज मल और चंदनमल का स्वर्गवास 1936 में हो गया। इस साल ही आपका भी स्वर्गवास हो गया। बाबू सूरज मल धार्मिक व्यक्ति थे और उन्हें साहित्य का बहुत शौंक था।

Seth Madan Gopal Perival- Fazilka

अच्छे वक्ता, लेखक और कवि सेठ मदन गोपाल ने गीता, भजनावली, व्यापार ब्यूरो, बीजगति भी लिखी। बाबू चंदनमल 9 साल तक पार्षद, सतानम धर्म स्कूल के 20 साल तक प्रधान रहे। उनका मशीनरी ज्ञान तीव्र था। बाबू गोरी शंकर सनातन धर्म स्कूल के प्रधान, संस्कृत विद्यालय के उपप्रधान, साधू आश्रम पुस्कालय के उपप्रधान के अलावा अन्य कई संस्थाओं से जुड़े रहे। बाबू जस राज 1934 में पार्षद चुने गए। सन् 1936 में वह असेसर और अटेंडन्स ऑफिसर ऑफ स्कूल रहे और सनातन धर्म गल्र्स स्कूल और गोशाला के उपप्रधान रहे । सेठ आई दान व्यापार को कुशलता पूर्वक करते रहे। उनके नाम पर आज भी एक गली का नाम आईदान है। (Lachhman Dost- WhatsApp No- 99140-63937)

Fazilka Clock Tower

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